मकर संक्रांति
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ सूर्य उत्तरायण होते हैं, खरमास समाप्त होता है और शादी-ब्याह जैसे शुभ काम फिर से शुरू हो जाते हैं। उत्तर भारत में इसे स्नान, दान, खिचड़ी और तिल-गुड़ का पर्व माना जाता है।
किस दिन मनाते हैं
यह पर्व चंद्र तिथि से नहीं, सूर्य के राशि-परिवर्तन के क्षण से तय होता है, इसलिए हर साल लगभग एक ही अंग्रेज़ी तारीख के आसपास आता है। धर्मशास्त्र में मकर संक्रमण के बाद का समय पुण्य काल माना गया है। अगर संक्रमण सूर्यास्त के बाद हो, तो स्नान-दान अगले दिन सुबह किया जाता है। यही वजह है कि कभी-कभी तारीख एक दिन खिसक जाती है।
उत्तरायण का महत्व
उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है। महाभारत में भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर लेटे हुए भी प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी। इस बारे में और संक्रांति और उत्तरायण लेख में पढ़ें।
कैसे मनाते हैं
- गंगा स्नान: प्रयाग के माघ मेले, हरिद्वार, काशी और गंगासागर में भारी भीड़ होती है। घर पर हों तो पानी में थोड़ा गंगाजल और तिल डालकर नहाएँ और सूर्य को अर्घ्य दें।
- खिचड़ी: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में यह पर्व "खिचड़ी" ही कहलाता है। उड़द-चावल की खिचड़ी बनती है और कच्ची खिचड़ी दान की जाती है; गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की पुरानी परंपरा है।
- तिल-गुड़: तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी खाई और बाँटी जाती हैं, और तिल व कंबल का दान होता है।
- पतंग: राजस्थान और गुजरात में आसमान पतंगों से भर जाता है।
क्या दान करें, इसकी सूची मकर संक्रांति दान और खिचड़ी में है।
पड़ोसी पर्व
एक रात पहले पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी की आग जलती है, पंजाब में अगले दिन माघी होती है। तमिलनाडु में यही समय पोंगल का है और असम में माघ बिहू का। खरमास क्या है, यह खरमास के नियम में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति हर साल लगभग एक ही तारीख को क्यों आती है?
मकर संक्रांति पर क्या दान करें?
इसे खिचड़ी क्यों कहते हैं?
उत्तरायण का क्या अर्थ है?
क्या मकर संक्रांति से खरमास खत्म हो जाता है?
लोहड़ी और मकर संक्रांति में क्या संबंध है?
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