शनि त्रयोदशी तिथियाँ 2026
प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद 90 मिनट) में त्रयोदशी तिथि होने वाले शनिवार को शनि त्रयोदशी (शनि प्रदोष) मनाई जाती है। यह शनिदेव और भगवान शिव को समर्पित है।
वर्ष 2026 की सभी शनि त्रयोदशी तिथियाँ, New Delhi, India के समय सहित।
शनि त्रयोदशी (शनि प्रदोष)
जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन प्रदोष काल में पड़ती है, तो उसे शनि त्रयोदशी या शनि प्रदोष कहते हैं। इस दिन एक साथ भगवान शिव का प्रदोष व्रत और शनि देव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह संयोग शनि की पीड़ा कम करने और संतान सुख के लिए विशेष फल देता है।
किस दिन पड़ती है
हर महीने दो त्रयोदशी आती हैं और उन पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष का दिन इस बात से तय होता है कि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में त्रयोदशी हो। जब ऐसा दिन शनिवार हो, तभी शनि प्रदोष बनता है, इसलिए यह साल में गिनी-चुनी बार ही आता है। वार के हिसाब से हर प्रदोष का अलग फल बताया गया है, जैसे सोमवार का सोम प्रदोष और मंगलवार का भौम प्रदोष।
पूजा कैसे करें
- सुबह स्नान करके शिव जी और शनि देव के व्रत का संकल्प लें। ज़्यादातर लोग दिन भर फलाहार पर रहते हैं।
- सुबह या दोपहर में पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएँ और सरसों या तिल के तेल का दीया जलाएँ।
- शनि देव को तिल का तेल, काले तिल, उड़द और नीले या काले फूल चढ़ाएँ; उनकी आँखों में सीधे न देखकर चरणों की ओर देखकर प्रणाम करने की रीत है।
- शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएँ; क्या चढ़ाएँ, यह शिवलिंग पूजा लेख में देखें।
- इसके बाद प्रदोष व्रत कथा सुनें और शनि देव की आरती करें, फिर व्रत खोलें।
दान और नियम
इस दिन काले तिल, उड़द, सरसों का तेल, लोहे का बर्तन, काला कंबल या जूते-चप्पल किसी ज़रूरतमंद को देना पारंपरिक दान है। शनि देव न्याय के देवता माने जाते हैं, इसलिए इस दिन मज़दूरों, बुज़ुर्गों और सेवकों के साथ अच्छा व्यवहार भी पूजा का ही हिस्सा समझा जाता है। शनिवार के सामान्य व्रत की कथा शनिवार व्रत कथा में है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि त्रयोदशी कब होती है?
शनि प्रदोष पर किसकी पूजा करें?
शनि प्रदोष व्रत कैसे खोलें?
शनि त्रयोदशी पर क्या दान करें?
क्या शनि प्रदोष संतान के लिए रखा जाता है?
शनि त्रयोदशी पर पढ़े जाने वाले स्तोत्र
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