वैशाख पूर्णिमा
वैशाख पूर्णिमा क्या है
वैशाख पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में सबसे अधिक जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध का जन्म, बोधगया में ज्ञान-प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण, तीनों इसी तिथि को हुए। हिंदू परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की जयंती भी मनाई जाती है, और पूरे वैशाख मास के स्नान-व्रत का समापन भी इसी पूर्णिमा पर होता है।
किस तिथि को
वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, जो अप्रैल-मई में आती है। शुक्ल पक्ष की तिथि होने से इसका नाम पूर्णिमांत और अमांत दोनों पंचांगों में एक जैसा है। स्नान-दान के लिए सूर्योदय वाली पूर्णिमा ली जाती है।
कैसे मनाते हैं
- स्नान और दान: गंगा या किसी नदी में स्नान, और गर्मी के अनुरूप जल से भरा घड़ा, सत्तू, पंखा, छाता और मौसमी फल का दान। स्कन्द पुराण के वैशाख माहात्म्य में इस पूर्णिमा के जल-दान को बहुत पुण्यदायी बताया गया है।
- सत्यनारायण कथा: बहुत से घरों में पूर्णिमा की शाम पूर्णिमा व्रत कथा या सत्यनारायण कथा होती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
- कूर्म जयंती: विष्णु मंदिरों में समुद्र मंथन के समय मंदराचल को अपनी पीठ पर उठाने वाले कूर्म भगवान की पूजा होती है; देखें कूर्म जयंती।
- बुद्ध पूर्णिमा: बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर में विशेष आयोजन होते हैं; बौद्ध घरों में दीप जलाए जाते हैं और खीर बाँटी जाती है। विवरण बुद्ध पूर्णिमा पृष्ठ पर है।
आगे-पीछे के पर्व
इस पूर्णिमा से एक दिन पहले वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को नृसिंह जयंती होती है। दक्षिण भारत में वैकासी विशाखम का पर्व भगवान मुरुगन से जुड़ा है, जो विशाखा नक्षत्र से तय होता है और प्रायः इसी पूर्णिमा के आसपास पड़ता है। विष्णु के सभी अवतारों के बारे में विष्णु के 10 अवतार पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
वैशाख पूर्णिमा पर क्या दान करें?
कूर्म जयंती कब होती है?
वैशाख पूर्णिमा का व्रत कैसे खोलें?
क्या वैशाख स्नान इसी दिन पूरा होता है?
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