2026

बुद्ध पूर्णिमा 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध का जन्म, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण, तीनों इसी तिथि से जुड़े हैं। हिंदू परिवारों के लिए यह वैशाख पूर्णिमा का स्नान-दान वाला दिन भी है।

क्या है और क्यों मनाते हैं

उत्तर भारत के बहुत से पंचांगों और गीत गोविंद जैसी रचनाओं में बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवाँ अवतार माना गया है, हालाँकि कुछ परंपराएँ नौवें अवतार के रूप में बलराम को गिनती हैं। बौद्ध समाज इसे वेसाक के रूप में मनाता है। सारनाथ, बोधगया और कुशीनगर में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं। इसी पूर्णिमा पर कूर्म जयंती भी मनाई जाती है।

किस तिथि को

वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा। जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो, वह स्नान-दान के लिए लिया जाता है। पूर्णिमा का व्रत रखने वाले चंद्रोदय के समय को भी देखते हैं। हर महीने की पूर्णिमा की सूची पूर्णिमा कैलेंडर पर है।

कैसे मनाते हैं

  • गंगा, यमुना या पास की नदी में सुबह स्नान; हरिद्वार और प्रयागराज में भीड़ रहती है।
  • गर्मी को देखते हुए जल से भरा घड़ा, सत्तू, शक्कर, पंखा और छाता दान।
  • घर में सत्यनारायण पूजा और कथा।
  • बौद्ध विहारों में दीप, फूल, धम्म-पाठ और बोधि वृक्ष के पास दूध-जल अर्पण।
  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य और दीपदान।

इस दिन बहुत से लोग मांसाहार और शराब से दूर रहते हैं, पक्षियों को पिंजरे से मुक्त करने या पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने की परंपरा भी कई जगह है। बुद्ध के करुणा और अहिंसा के संदेश को याद करते हुए यह दिन सादगी से बिताना अच्छा माना जाता है।

पूर्णिमा व्रत से जुड़ी कहानी पूर्णिमा व्रत कथा में पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुद्ध पूर्णिमा कब होती है?
वैशाख मास की पूर्णिमा को। इस साल की तारीख इसी पृष्ठ पर ऊपर दी गई है।
क्या बुद्ध विष्णु के अवतार माने जाते हैं?
उत्तर भारत की कई परंपराओं और पंचांगों में बुद्ध को विष्णु का नौवाँ अवतार माना जाता है, जबकि कुछ परंपराएँ नौवें स्थान पर बलराम को रखती हैं।
बुद्ध पूर्णिमा पर क्या दान करें?
गर्मी का समय होने से जल से भरा घड़ा, सत्तू, शक्कर, पंखा, छाता और अन्न का दान शुभ माना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा पर और कौन सा पर्व आता है?
इसी पूर्णिमा को कूर्म जयंती और वैशाख पूर्णिमा का स्नान-दान होता है; कई घरों में सत्यनारायण कथा भी होती है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...