बु

श्री बुद्ध अष्टोत्तरशतनामावलिः

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तर108 नाम
0 व्यूज़
  1. ॐ बुद्धाय नमः
  2. ॐ बुधजनानंदिने नमः
  3. ॐ बुद्धिमते नमः
  4. ॐ बुद्धिचोदनाय नमः
  5. ॐ बुद्धप्रियाय नमः
  6. ॐ बुद्धषट्काय नमः
  7. ॐ बोधिताद्वैतसंहिताय नमः
  8. ॐ बुद्धिदूराय नमः
  9. ॐ बोधरूपाय नमः
  10. ॐ बुद्धसर्वाय नमः 
  11. ॐ बुधांतराय नमः
  12. ॐ बुद्धिकृते नमः
  13. ॐ बुद्धिविदे नमः
  14. ॐ बुद्धये नमः
  15. ॐ बुद्धिभिदे नमः
  16. ॐ बुद्धिपते नमः
  17. ॐ बुधाय नमः
  18. ॐ बुद्ध्यालयाय नमः
  19. ॐ बुद्धिलयाय नमः
  20. ॐ बुद्धिगम्याय नमः
  21. ॐ बुधेश्वराय नमः
  22. ॐ बुद्ध्यकामाय नमः
  23. ॐ बुद्धवपुषे नमः
  24. ॐ बुद्धिभोक्त्रे नमः
  25. ॐ बुधावनाय नमः
  26. ॐ बुद्धिप्रतिगतानंदाय नमः
  27. ॐ बुद्धिमुषे नमः
  28. ॐ बुद्धिभासकाय नमः
  29. ॐ बुद्धिप्रियाय नमः
  30. ॐ बुद्ध्यवश्याय नमः 
  31. ॐ बुद्धिशोधिने नमः
  32. ॐ बुधाशयाय नमः
  33. ॐ बुद्धीश्वराय नमः
  34. ॐ बुद्धिसखाय नमः
  35. ॐ बुद्धिदाय नमः
  36. ॐ बुद्धिबांधवाय नमः
  37. ॐ बुद्धिनिर्मितभूतौघाय नमः
  38. ॐ बुद्धिसाक्षिणे नमः
  39. ॐ बुधोत्तमाय नमः
  40. ॐ बहुरूपाय नमः
  41. ॐ बहुगुणाय नमः
  42. ॐ बहुमायाय नमः
  43. ॐ बहुक्रियाय नमः
  44. ॐ बहुभोगाय नमः
  45. ॐ बहुमताय नमः
  46. ॐ बहुनाम्ने नमः
  47. ॐ बहुप्रदाय नमः
  48. ॐ बुधेतरवराचार्याय नमः
  49. ॐ बहुभद्राय नमः
  50. ॐ बहुप्रधाय नमः 
  51. ॐ बृंदारकावनाय नमः
  52. ॐ ब्रह्मणे नमः
  53. ॐ ब्रह्मदूषणकैतवाय नमः
  54. ॐ ब्रह्मैश्वर्याय नमः
  55. ॐ बहुबलाय नमः
  56. ॐ बहुवीर्याय नमः
  57. ॐ बहुप्रभाय नमः
  58. ॐ बहुवैराग्यभरिताय नमः
  59. ॐ बहुश्रिये नमः
  60. ॐ बहुधर्मविदे नमः 
  61. ॐ बहुलोकजयिने नमः
  62. ॐ बंधमोचकाय नमः
  63. ॐ बाधितस्मराय नमः
  64. ॐ बृहस्पतिगुरवे नमः
  65. ॐ ब्रह्मस्तुताय नमः
  66. ॐ ब्रह्मादिनायकाय नमः
  67. ॐ ब्रह्मांडनायकाय नमः
  68. ॐ ब्रध्नभास्वराय नमः
  69. ॐ ब्रह्मतत्पराय नमः
  70. ॐ बलभद्रसखाय नमः 
  71. ॐ बद्धसुभद्राय नमः
  72. ॐ बहुजीवनाय नमः
  73. ॐ बहुभुजे नमः
  74. ॐ बहिरंतस्थाय नमः
  75. ॐ बहिरिंद्रियदुर्गमाय नमः
  76. ॐ बलाहकाभाय नमः
  77. ॐ बाधाच्छिदे नमः
  78. ॐ बिसपुष्पाभलोचनाय नमः
  79. ॐ बृहद्वक्षसे नमः
  80. ॐ बृहत्क्रीडाय नमः 
  81. ॐ बृहद्रुमाय नमः
  82. ॐ बृहत्प्रियाय नमः
  83. ॐ बृहत्तृप्ताय नमः
  84. ॐ ब्रह्मरथाय नमः
  85. ॐ ब्रह्मविदे नमः
  86. ॐ ब्रह्मपारकृते नमः
  87. ॐ बाधितद्वैतविषयाय नमः
  88. ॐ बहुवर्णविभागहृते नमः
  89. ॐ बृहज्जगद्भेददूषिणे नमः
  90. ॐ बह्वाश्चर्यरसोदधये नमः 
  91. ॐ बृहत्क्षमाय नमः
  92. ॐ बहुकृपाय नमः
  93. ॐ बहुशीलाय नमः
  94. ॐ बलिप्रियाय नमः
  95. ॐ बाधिताशिष्टनिकराय नमः
  96. ॐ बाधातीताय नमः
  97. ॐ बहूदयाय नमः
  98. ॐ बाधितांतश्शत्रुजालाय नमः
  99. ॐ बद्धचित्तहयोत्तमाय नमः
  100. ॐ बहुधर्मप्रवचनाय नमः 
  101. ॐ बहुमंतव्यभाषिताय नमः
  102. ॐ बर्हिर्मुखशरण्याय नमः
  103. ॐ ब्रह्मण्याय नमः
  104. ॐ ब्राह्मणप्रियाय नमः
  105. ॐ ब्रह्मस्तुताय नमः
  106. ॐ ब्रह्मबंधवे नमः
  107. ॐ ब्रह्मसुवे नमः
  108. ॐ ब्रह्मशाय नमः 

|| इति श्री  बुद्ध अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री बुद्ध अष्टोत्तरशतनामावलिः हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जो नवग्रहों में से एक, बुध ग्रह को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। 'बुद्ध' शब्द यहां ज्ञान, बुद्धि और जागृति का प्रतीक है, और ज्योतिष में बुध ग्रह बुद्धि, संचार, तर्क और विश्लेषणात्मक क्षमता का स्वामी माना जाता है। यह नामावली बुध ग्रह के दिव्य गुणों, शक्ति और आशीर्वाद का आह्वान करती है, जिससे भक्तों को ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।

इस अष्टोत्तरशतनामावलिः का प्रत्येक नाम बुध देव के विभिन्न आयामों और शक्तियों को उजागर करता है। 'ॐ बुद्धाय नमः' जैसे पहले नाम से ही भगवान के प्रति समर्पण का भाव व्यक्त होता है। 'बुधजनानंदिने नमः' का अर्थ है जो ज्ञानियों को आनंदित करते हैं, 'बुद्धिमतें नमः' का अर्थ है जो अत्यंत बुद्धिमान हैं, और 'बुद्धिचोदनाय नमः' का अर्थ है जो बुद्धि को प्रेरित करते हैं। ये नाम दर्शाते हैं कि बुध केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि मानव की आंतरिक बुद्धि और ज्ञान का स्रोत भी हैं। इस स्तोत्र का निरंतर पाठ मन को शुद्ध करता है, विचारों में स्पष्टता लाता है और आध्यात्मिक जागृति को बढ़ावा देता है।

चूंकि बुध ग्रह संचार, शिक्षा, व्यापार और तार्किक सोच का अधिपति है, इस नामावली का पाठ इन क्षेत्रों में उत्कृष्ट परिणाम देता है। 'बोधरूपाय नमः' का अर्थ है जो ज्ञान के स्वरूप हैं, 'बुद्धिकृते नमः' का अर्थ है जो बुद्धि का निर्माण करते हैं, और 'बुद्धिविदे नमः' का अर्थ है जो बुद्धि को जानते हैं - ये नाम बुध देव को ज्ञान का अंतिम स्रोत और प्रवर्तक के रूप में बल देते हैं। ज्योतिष में बुध दोष से पीड़ित व्यक्ति इस नामावली का पाठ करके दोषों को दूर कर शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। यह मन की चंचलता को कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करता है।

यह नामावली केवल ग्रह को शांत करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्तों के भीतर छिपे ज्ञान और बुद्धि को भी जागृत करती है। यह भक्तों को स्पष्ट सोच, बेहतर संचार कौशल, त्वरित समझ और मजबूत स्मरण शक्ति प्रदान करती है। बुधवार को या बुध होरा में इस स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। समर्पण और शुद्ध मन से इस नामावली का पाठ करने वालों को बुध देव का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान होता है।

लाभ (Benefits):

  • बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि: इस स्तोत्र के पाठ से मन की एकाग्रता बढ़ती है, स्मरण शक्ति और समझने की क्षमता में सुधार होता है, जिससे अध्ययन और बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलती है।
  • संचार कौशल में सुधार: चूंकि बुध संचार का ग्रह है, इसका पाठ करने से वाणी में स्पष्टता आती है, बेहतर भाषण क्षमता विकसित होती है और सार्वजनिक बोलने के कौशल में सुधार होता है।
  • बुध दोष निवारण: ज्योतिष में बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह नामावली एक प्रभावी उपाय है। यह ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को कम करके शुभ फल प्रदान करती है।
  • व्यापार और करियर में सफलता: बुध व्यापार, वाणिज्य और करियर का स्वामी है, इसलिए इसका पाठ व्यापारिक सौदों में सफलता, वित्तीय स्थिरता और पेशेवर जीवन में प्रगति लाता है।
  • मानसिक शांति और स्पष्टता: यह स्तोत्र मन की चंचलता को कम करके मानसिक शांति और विचारों में स्पष्टता प्रदान करता है, जिससे बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री बुद्ध अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
यह नवग्रहों में से एक, बुध ग्रह को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। इसका पाठ बुद्धि, ज्ञान और संचार कौशल को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन, विशेषकर बुधवार को या बुध होरा में स्नान के बाद शुद्ध मन से करना चाहिए। भगवान को दीपक और धूप अर्पित करके भक्तिपूर्वक पाठ कर सकते हैं।
श्री बुद्ध अष्टोत्तरशतनामावलिः के पाठ के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इसके पाठ से बुद्धि, स्मरण शक्ति और संचार कौशल बढ़ते हैं। ज्योतिषीय बुध दोष दूर होता है और व्यापार, शिक्षा तथा करियर में सफलता मिलती है।
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
छात्रों, शिक्षकों, व्यापारियों, बेहतर संचार कौशल चाहने वालों और जिनकी कुंडली में बुध दोष है, उन्हें इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
श्री बुद्ध अष्टोत्तरशतनामावलिः का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
कम से कम दिन में एक बार, या बुधवार को 11, 21, या 108 बार पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
इस स्तोत्र का मूल या उद्गम क्या है?
यह अष्टोत्तरशतनामावलिः प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथों, विशेषकर पुराणों और नवग्रहों को समर्पित ज्योतिषीय ग्रंथों में पाई जाती है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...