श्री बलराम कवचं
दुर्योधन उवाच |
गोपीभ्यः कवचं दत्तं गर्गाचार्येण धीमता |
सर्वरक्षाकरं दिव्यं देहि मह्यं महामुने || 1 ||
प्राड्विपाक उवाच |
स्नात्वा जले क्षौमधरः कुशासनः
पवित्रपाणिः कृतमंत्रमार्जनः |
स्मृत्वाथ नत्वा बलमच्युताग्रजं
संधारयेद्धर्मसमाहितो भवेत् || 2 ||
गोलोकधामाधिपतिः परेश्वरः
परेषु मां पातु पवित्रकीर्तनः |
भूमंडलं सर्षपवद्विलक्ष्यते
यन्मूर्ध्नि मां पातु स भूमिमंडले || 3 ||
सेनासु मां रक्षतु सीरपाणिः
युद्धे सदा रक्षतु मां हली च |
दुर्गेषु चाव्यान्मुसली सदा मां
वनेषु संकर्षण आदिदेवः || 4 ||
कलिंदजावेगहरो जलेषु
नीलांबरो रक्षतु मां सदाग्नौ |
वायौ च रामोऽवतु खे बलश्च
महार्णवेऽनंतवपुः सदा मां || 5 ||
श्रीवासुदेवोऽवतु पर्वतेषु
सहस्रशीर्षा च महाविवादे |
रोगेषु मां रक्षतु रौहिणेयो
मां कामपालोऽवतु वा विपत्सु || 6 ||
कामात्सदा रक्षतु धेनुकारिः
क्रोधात्सदा मां द्विविदप्रहारी |
लोभात्सदा रक्षतु बल्वलारिः
मोहात्सदा मां किल मागधारिः || 7 ||
प्रातः सदा रक्षतु वृष्णिधुर्यः
प्राह्णे सदा मां मथुरापुरेंद्रः |
मध्यंदिने गोपसखः प्रपातु
स्वराट् पराह्णेऽवतु मां सदैव || 8 ||
सायं फणींद्रोऽवतु मां सदैव
परात्परो रक्षतु मां प्रदोषे |
पूर्णे निशीथे च दुरंतवीर्यः
प्रत्यूषकालेऽवतु मां सदैव || 9 ||
विदिक्षु मां रक्षतु रेवतीपतिः
दिक्षु प्रलंबारिरधो यदूद्वहः |
ऊर्ध्वं सदा मां बलभद्र आरा-
-त्तथा समंताद्बलदेव एव हि || 10 ||
अंतः सदाव्यात्पुरुषोत्तमो बहि-
-र्नागेंद्रलीलोऽवतु मां महाबलः |
सदांतरात्मा च वसन् हरिः स्वयं
प्रपातु पूर्णः परमेश्वरो महान् || 11 ||
देवासुराणां भयनाशनं च
हुताशनं पापचयेंधनानां |
विनाशनं विघ्नघटस्य विद्धि
सिद्धासनं वर्मवरं बलस्य || 12 ||
इति श्रीगर्गसंहितायां बलभद्रखंडे बलरामकवचं |
अर्थ
श्री बलराम कवचम् एक अत्यंत शक्तिशाली और सुरक्षात्मक स्तोत्र है, जो भगवान बलराम की दिव्य शक्ति का आह्वान करता है और भक्तों को सर्वांगीण सुरक्षा प्रदान करता है। इस कवच का उद्गम महाभारत काल में दुर्योधन और गर्ग मुनि के संवाद में मिलता है। दुर्योधन ने गर्ग मुनि से प्रार्थना की कि वे उन्हें वह श्रेष्ठ बलराम कवच प्रदान करें जो उन्होंने गोपियों को दिया था। तब प्राड्विपाक मुनि ने इस कवच के पाठ की विधि और इसके महत्व का विस्तार से वर्णन किया। इस कवच का पाठ करने से पहले स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, पवित्र कुशासन पर बैठकर, शुद्ध मन से भगवान बलराम का स्मरण करना चाहिए। ऐसा करने से भक्त धर्मपरायण बनता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त होता है।
यह कवच भगवान बलराम के विभिन्न स्वरूपों और उनकी अपार शक्ति की स्तुति करता है। प्रार्थना की जाती है कि गोलोकधाम के अधिपति परमेश्वर बलराम पृथ्वीमंडल पर भक्त की रक्षा करें। युद्धक्षेत्र में हलायुध (हल धारण करने वाले) रूप में, दुर्गम स्थानों पर मुसली (गदा धारण करने वाले) रूप में, और वनों में आदिदेव संकर्षण रूप में बलराम रक्षा करें। नदियों में, अग्नि में, वायु में, आकाश में और महासागर में अनंतवपु रूप में बलराम सदैव रक्षा करें। पर्वतों पर वासुदेव के रूप में, बड़े विवादों में सहस्रशीर्ष के रूप में, रोगों में रौहिणेय के रूप में, और विपत्तियों में कामपाल के रूप में बलराम रक्षा करें, प्रत्येक श्लोक भगवान के विभिन्न आयामों का आह्वान करता है।
यह कवच केवल भौतिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि पर भी बल देता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसी दुष्प्रवृत्तियों से रक्षा के लिए धेनुकासुर, द्विविद, बलवल और जरासंध जैसे राक्षसों का संहार करने वाले बलराम की स्तुति की जाती है। दिन के प्रत्येक प्रहर में - सुबह में वृष्णि श्रेष्ठ के रूप में, दोपहर में मथुराधीश के रूप में, दोपहर बाद गोपसखा के रूप में, शाम को स्वराट् के रूप में, रात्रि में फणींद्रलीलावतार के रूप में, और ब्रह्ममुहूर्त में परात्पर के रूप में बलराम भक्त की रक्षा करें ऐसी प्रार्थना की जाती है। सभी दिशाओं से रेवतीपति, यदूद्वह, बलभद्र सभी प्रकार से सुरक्षा प्रदान करें।
अंत में, यह कवच प्रार्थना करता है कि बलराम भक्त के अंतरंग में पुरुषोत्तम के रूप में और बाह्य रूप से नागलीला स्वरूप में निवास करके रक्षा करें। स्वयं श्रीहरि भक्त के हृदय में वास करके उसकी सदैव रक्षा करें, यही इस कवच का गूढ़ अर्थ है। इस दिव्य श्री बलराम कवच का नियमित पाठ करने से देवों और असुरों से उत्पन्न होने वाले भय दूर होते हैं, सभी पाप भस्म हो जाते हैं, और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं समाप्त होती हैं।
लाभ (Benefits):
- समग्र सुरक्षा: यह कवच भक्त को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। युद्ध, खतरनाक स्थानों और वनों जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बलराम रक्षक के रूप में खड़े होते हैं।
- पाप निवारण: कवच के नियमित पाठ से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्त आंतरिक शुद्धि प्राप्त करता है।
- भय और विघ्न निवारण: देवी-देवताओं, असुरों और अन्य बुरी शक्तियों से उत्पन्न होने वाले भय दूर होते हैं। जीवन पथ में आने वाली सभी बाधाएं और विघ्न समाप्त हो जाते हैं।
- आंतरिक शुद्धि: काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे नकारात्मक गुणों से रक्षा मिलती है और भक्त को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: रोगों से मुक्ति और विपत्तियों से रक्षा के साथ-साथ, भक्त को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री बलराम कवचम् क्या है?
इस कवच का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री बलराम कवचम् का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
इस कवच का पाठ कौन कर सकता है?
इस कवच का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री बलराम कवचम् का उद्गम क्या है?
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