2026

नृसिंह जयंती 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

नृसिंह जयंती

नृसिंह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह के प्रकट होने का दिन है। यह वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है और इसकी पूजा शाम को, संध्या के समय होती है, क्योंकि भगवान इसी बेला में खंभा फाड़कर प्रकट हुए थे।

क्या है और क्यों मनाते हैं

हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से ऐसा वर पाया था कि उसे न मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र-शस्त्र से। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था, और यही बात उसे सहन नहीं थी। जब उसने प्रह्लाद से पूछा कि तेरा भगवान कहाँ है, क्या इस खंभे में है, तो खंभे से आधे मनुष्य, आधे सिंह रूप में नृसिंह प्रकट हुए। उन्होंने संध्या के समय, दहलीज़ पर, अपनी जाँघों पर रखकर नखों से उसका अंत किया। इस तरह वरदान की हर शर्त बनी रही और भक्त की रक्षा भी हुई। यह कथा भागवत पुराण और विष्णु पुराण दोनों में है।

किस तिथि को

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी, यानी वैशाख पूर्णिमा से एक दिन पहले। जिस दिन सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में चतुर्दशी हो, वही दिन लिया जाता है। शुक्ल पक्ष होने से अमांत और पूर्णिमांत में महीने का नाम एक ही है।

व्रत और पूजा

  • सुबह संकल्प लेकर दिन भर व्रत रखें; फल और दूध लिया जा सकता है।
  • संध्या के समय नृसिंह भगवान और लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र का पंचामृत से अभिषेक करें, चंदन, पीले फूल और तुलसी चढ़ाएँ।
  • प्रह्लाद की कथा पढ़ें और विष्णु जी की आरती गाएँ।
  • अगले दिन सुबह ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान देकर पारण करें।

प्रह्लाद की ही एक और कथा होली से जुड़ी है, जिसे होलिका दहन की कथा में पढ़ सकते हैं। विष्णु के बाकी अवतारों के बारे में विष्णु के 10 अवतार लेख देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नृसिंह जयंती किस तिथि को होती है?
नृसिंह जयंती वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को होती है। जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में चतुर्दशी हो, वही दिन माना जाता है।
नृसिंह भगवान की पूजा किस समय करें?
मुख्य पूजा संध्या या प्रदोष काल में की जाती है, क्योंकि कथा के अनुसार भगवान इसी समय प्रकट हुए थे।
नृसिंह जयंती का व्रत कैसे खोलें?
व्रत अगले दिन सुबह स्नान, पूजा और दान के बाद खोला जाता है।
नृसिंह अवतार क्यों हुआ?
हिरण्यकशिपु के अत्याचार से भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने आधे मनुष्य और आधे सिंह का रूप लिया।
नृसिंह जयंती पर क्या चढ़ाएँ?
पंचामृत, चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, फल और गुड़ या मिश्री का भोग चढ़ाया जाता है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...