भगवान विष्णु के दस मुख्य अवतार, जिन्हें दशावतार कहते हैं, ये हैं: मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। हर अवतार किसी ख़ास संकट के समय हुआ, जब धरती, वेद या भक्त ख़तरे में थे। पहले चार सतयुग में, अगले तीन त्रेता में, कृष्ण द्वापर के अंत में, बुद्ध कलियुग में, और कल्कि कलियुग के अंत में होने वाले माने जाते हैं।
अवतार क्यों: गीता का वचन
अवतार का अर्थ है "उतरना"। भगवान ऊपर से धरती पर उतरकर किसी रूप में प्रकट होते हैं। इसका कारण भगवद्गीता के चौथे अध्याय में श्रीकृष्ण ख़ुद बताते हैं:
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
सीधे शब्दों में: जब-जब धर्म कमज़ोर पड़ता है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं प्रकट होता हूँ, सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म को फिर से स्थापित करने के लिए, हर युग में। दशावतार की पूरी सूची इसी वचन का विस्तार है।
दस अवतार एक नज़र में
| क्र. | अवतार | रूप | युग | मुख्य कार्य |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मत्स्य | मछली | सतयुग | प्रलय में वेद और मनु की रक्षा |
| 2 | कूर्म | कछुआ | सतयुग | समुद्र मंथन में मंदराचल को पीठ पर उठाया |
| 3 | वराह | सूअर | सतयुग | हिरण्याक्ष से धरती को समुद्र से निकाला |
| 4 | नृसिंह | आधा नर, आधा सिंह | सतयुग | प्रह्लाद की रक्षा, हिरण्यकशिपु का वध |
| 5 | वामन | बौना ब्राह्मण बालक | त्रेता | तीन पग में तीनों लोक, राजा बलि का अहंकार दूर |
| 6 | परशुराम | फरसाधारी ऋषि | त्रेता | अत्याचारी राजाओं का दमन |
| 7 | राम | मर्यादा पुरुषोत्तम | त्रेता | रावण का वध, आदर्श जीवन का उदाहरण |
| 8 | कृष्ण | पूर्ण अवतार | द्वापर | कंस वध, महाभारत, गीता का उपदेश |
| 9 | बुद्ध | संन्यासी | कलियुग | करुणा और अहिंसा का संदेश |
| 10 | कल्कि | श्वेत अश्व पर योद्धा | कलियुग का अंत | अधर्म का अंत, नए सतयुग की शुरुआत |
हर अवतार की कथा संक्षेप में
1. मत्स्य अवतार
राजा सत्यव्रत (जो आगे वैवस्वत मनु बने) नदी में तर्पण कर रहे थे, तभी एक छोटी मछली उनकी अंजलि में आ गई और रक्षा माँगी। मछली रोज़ बढ़ती गई, घड़े से तालाब, तालाब से समुद्र तक। तब भगवान ने बताया कि प्रलय आने वाली है। मनु ने सप्तऋषियों, बीजों और जीवों के साथ नाव में शरण ली और मत्स्य भगवान ने उस नाव को अपने सींग से बाँधकर पार लगाया। इसी अवतार में हयग्रीव से वेद भी वापस लाए गए।
2. कूर्म अवतार
देवता और असुर अमृत के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे। मथानी बना मंदराचल पर्वत बार-बार डूब रहा था। तब विष्णु जी विशाल कछुए के रूप में समुद्र के तल पर आए और पर्वत को अपनी पीठ पर टिका लिया। इसी मंथन से लक्ष्मी, अमृत और हलाहल विष निकले।
3. वराह अवतार
असुर हिरण्याक्ष धरती को पाताल के समुद्र में ले गया। भगवान ने वराह का रूप लिया, समुद्र में उतरकर हिरण्याक्ष को मारा और धरती को अपने दाँतों पर उठाकर फिर से उसकी जगह स्थापित किया।
4. नृसिंह अवतार
हिरण्यकशिपु को वरदान था कि उसे न मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, न घर के अंदर न बाहर। उसका बेटा प्रह्लाद विष्णु भक्त था, जिसे मारने की उसने कई कोशिशें कीं। आख़िर में भगवान खंभे से आधे मनुष्य, आधे सिंह के रूप में संध्या के समय प्रकट हुए और दहलीज़ पर उसे अपनी गोद में रखकर नाखूनों से मार दिया। वरदान की हर शर्त टूटी भी नहीं और भक्त की रक्षा भी हुई। होलिका की कथा भी इसी प्रसंग से जुड़ी है।
5. वामन अवतार
दानवीर राजा बलि ने तीनों लोक जीत लिए थे। भगवान बौने ब्राह्मण बालक बनकर उसके यज्ञ में पहुँचे और तीन पग भूमि माँगी। बलि ने हाँ कहा तो वामन ने विराट रूप लेकर दो पग में धरती और आकाश नाप लिए। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताल का राजा बनाया।
6. परशुराम अवतार
ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र परशुराम ने शिव जी से फरसा पाया था। सहस्रार्जुन ने उनके पिता की कामधेनु छीनी और बाद में जमदग्नि की हत्या हुई। तब परशुराम ने अहंकारी और अत्याचारी राजाओं से धरती को मुक्त किया। मान्यता है कि वे चिरंजीवी हैं।
7. राम अवतार
अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम ने पिता के वचन के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया, सीता हरण के बाद हनुमान और वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की और रावण का वध किया। राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने हर रिश्ते में आदर्श निभाया।
8. कृष्ण अवतार
मथुरा के कारागार में जन्मे, गोकुल-वृंदावन में पले कृष्ण ने कंस का अंत किया, द्वारका बसाई और महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। उन्हें पूर्ण अवतार माना जाता है। कुछ परंपराओं में, जैसे जयदेव के गीत गोविंद में, आठवें स्थान पर बलराम हैं और कृष्ण को स्वयं सब अवतारों का स्रोत माना गया है।
9. बुद्ध अवतार
पुराणों में बुद्ध को विष्णु का नौवाँ अवतार माना गया है, जिन्होंने करुणा, अहिंसा और पशुबलि के विरोध का संदेश दिया। कुछ क्षेत्रीय सूचियों में बुद्ध की जगह बलराम या जगन्नाथ का नाम आता है।
10. कल्कि अवतार
कल्कि अवतार अभी होना बाकी है। कल्कि पुराण और भागवत के अनुसार कलियुग के अंत में शंभल ग्राम में विष्णुयश नाम के ब्राह्मण के घर कल्कि जन्म लेंगे, देवदत्त नाम के सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर तलवार से अधर्म का नाश करेंगे और फिर से सतयुग शुरू होगा।
अवतारों की जयंतियाँ
- मत्स्य जयंती: चैत्र शुक्ल तृतीया
- कूर्म जयंती: वैशाख पूर्णिमा, देखें कूर्म जयंती
- वराह जयंती: भाद्रपद शुक्ल तृतीया
- नृसिंह जयंती: वैशाख शुक्ल चतुर्दशी, देखें नृसिंह जयंती
- वामन जयंती: भाद्रपद शुक्ल द्वादशी
- परशुराम जयंती: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया), देखें परशुराम जयंती
- राम नवमी: चैत्र शुक्ल नवमी, देखें राम नवमी
- जन्माष्टमी: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, देखें कृष्ण जन्माष्टमी
- बुद्ध पूर्णिमा: वैशाख पूर्णिमा
- कल्कि जयंती: श्रावण शुक्ल षष्ठी
24 अवतार की मान्यता
दस अवतार सबसे प्रसिद्ध हैं, पर श्रीमद्भागवत पुराण के पहले स्कंध में अवतारों की लंबी सूची है और कहा गया है कि भगवान के अवतार अनगिनत हैं। लोक परंपरा में 24 अवतार गिने जाते हैं, जिनमें दशावतार के अलावा सनकादि ऋषि, नारद, नर-नारायण, कपिल मुनि, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, धन्वंतरि, मोहिनी, हयग्रीव, हंस, व्यास और हरि जैसे नाम आते हैं। धन्वंतरि जयंती धनतेरस को और मोहिनी एकादशी वैशाख में इन्हीं से जुड़ी हैं।
किसी भी अवतार की पूजा के अंत में ॐ जय जगदीश हरे आरती गाई जा सकती है, जो सभी रूपों में विष्णु की स्तुति है।

