परशुराम जयंती
परशुराम जयंती भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्म का उत्सव है। यह वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है और अधिकतर वर्षों में अक्षय तृतीया के दिन ही पड़ती है। उत्तर भारत में इस दिन शोभा यात्राएँ निकलती हैं और विष्णु-परशुराम की पूजा होती है।
परशुराम कौन हैं
परशुराम ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। शिव जी की तपस्या से उन्हें परशु यानी फरसा मिला, इसी से उनका नाम परशुराम पड़ा। अन्यायी राजा सहस्रार्जुन ने जब उनके पिता के आश्रम की कामधेनु छीनी और बाद में जमदग्नि का वध हुआ, तो परशुराम ने अत्याचारी राजाओं के विरुद्ध युद्ध छेड़ा। वे ब्राह्मण कुल में जन्मे, पर स्वभाव से योद्धा थे। उन्हें आठ चिरंजीवियों में गिना जाता है, यानी मान्यता है कि वे आज भी तपस्या में लीन हैं। रामायण में सीता स्वयंवर के बाद श्रीराम से और महाभारत में भीष्म, द्रोण और कर्ण के गुरु के रूप में उनका उल्लेख आता है।
किस तिथि को
वैशाख शुक्ल तृतीया। परंपरा के अनुसार परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए जिस दिन सूर्यास्त के बाद तृतीया हो, वह दिन जयंती के लिए लिया जाता है। कभी-कभी तिथि के फेर से यह अक्षय तृतीया से एक दिन पहले भी पड़ जाती है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह स्नान कर विष्णु जी और परशुराम जी की पूजा करें; चंदन, तुलसी, पीले फूल और फल चढ़ाएँ।
- कई लोग दिन भर व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद फलाहार करते हैं।
- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के शहरों में फरसा लिए परशुराम की झाँकियों के साथ शोभा यात्राएँ निकलती हैं।
- अक्षय तृतीया के साथ होने से जल, सत्तू, घड़ा और अन्न का दान भी इसी दिन किया जाता है।
अक्षय तृतीया के दिन क्या करें, यह अक्षय तृतीया पर क्या करें में पढ़ें, और विष्णु के बाकी अवतारों की कहानी विष्णु के 10 अवतार में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परशुराम जयंती कब मनाई जाती है?
परशुराम किसके अवतार हैं?
परशुराम के माता-पिता कौन थे?
क्या परशुराम चिरंजीवी हैं?
परशुराम जयंती पर क्या करें?
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