चैत्र अमावस्या
चैत्र अमावस्या क्या है
चैत्र अमावस्या विक्रम संवत के पुराने वर्ष की आख़िरी अमावस्या है। इसके अगले दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि शुरू होते हैं। इसलिए यह दिन पितरों के तर्पण, स्नान-दान और नए साल के स्वागत की तैयारी, दोनों का है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग में यह चैत्र कृष्ण अमावस्या है, जो मार्च-अप्रैल में होली के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है। अमांत पंचांग में इसे फाल्गुन अमावस्या कहते हैं, क्योंकि वहाँ साल का आख़िरी महीना फाल्गुन इसी अमावस्या पर पूरा होता है। यानी दोनों पंचांगों में नया साल इसी अमावस्या के अगले दिन से गिना जाता है। स्नान-दान सूर्योदय वाली अमावस्या पर होता है।
इस दिन क्या करते हैं
- सुबह नदी स्नान या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान, और सूर्य को अर्घ्य।
- पितरों के लिए तिल-जल का तर्पण और ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन।
- घर की सफ़ाई और अगले दिन की कलश स्थापना के लिए जौ, मिट्टी, कलश और लाल चुनरी की तैयारी।
- गर्मी की शुरुआत होने से जल से भरा घड़ा, सत्तू और मौसमी फल का दान।
आगे-पीछे के पर्व
पूर्णिमांत गणना में इसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी (बसौड़ा) और एकादशी को पापमोचनी एकादशी आती है। अमावस्या के अगले दिन हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि घटस्थापना होती है; महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा और कर्नाटक-आंध्र में उगादि कहते हैं। विक्रम संवत कैसे गिना जाता है, यह विक्रम संवत क्या है में पढ़ें।
एक बात ध्यान रखें
चूँकि उत्तर भारत में चैत्र का महीना होली के अगले दिन से ही शुरू हो जाता है, कई लोग सोचते हैं कि नया साल भी तभी शुरू होता है। ऐसा नहीं है; संवत बदलने का दिन इसी अमावस्या के बाद की प्रतिपदा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चैत्र अमावस्या के अगले दिन क्या होता है?
अमांत पंचांग में इसे फाल्गुन अमावस्या क्यों कहते हैं?
चैत्र अमावस्या पर क्या करें?
क्या चैत्र अमावस्या पर नवरात्रि की ख़रीदारी कर सकते हैं?
होली के बाद यह अमावस्या कितने दिन में आती है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
