चैत्र नवरात्रि: घटस्थापना
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना क्या है
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की सुबह कलश स्थापित करके चैत्र नवरात्रि शुरू की जाती है, इसे घटस्थापना कहते हैं। यही दिन हिंदू नववर्ष, यानी नए विक्रम संवत का पहला दिन भी है। नौ दिन माँ दुर्गा की पूजा के बाद नवमी को राम नवमी मनाई जाती है, इसलिए उत्तर भारत में इसे राम नवरात्र भी कहते हैं।
किस तिथि और समय पर
घटस्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है, जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो। चैत्र शुक्ल पक्ष का नाम अमांत और पूर्णिमांत दोनों पंचांगों में एक ही है, इसलिए यहाँ महीने को लेकर कोई उलझन नहीं। शास्त्रों में प्रतिपदा के दिन का पहला एक-तिहाई भाग, यानी सुबह का समय, सबसे अच्छा माना गया है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय कलश बैठाने से बचने की परंपरा है; अगर सुबह ये दोष हों तो दोपहर का अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। आपके शहर का मुहूर्त इस पेज पर ऊपर और आज का पंचांग में देखें।
घर पर कैसे करें
मिट्टी के पात्र में साफ़ मिट्टी बिछाकर जौ बोए जाते हैं और उसके ऊपर या पास में जल भरा कलश रखा जाता है। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत डालकर आम या अशोक के पत्ते लगाते हैं और ऊपर लाल चुनरी में लिपटा नारियल रखते हैं। इसके बाद गणेश जी का ध्यान, नवग्रह और माँ दुर्गा का आवाहन होता है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। पूरी विधि और सामग्री सूची कलश स्थापना विधि में दी गई है। इस दिन का ध्यान मंत्र देवी माहात्म्य से:
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नववर्ष और यात्राएँ
इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण में उगादि मनाया जाता है। उत्तर भारत में घरों में नया पंचांग लाकर संवत का फल सुना जाता है। संवत की गिनती के बारे में विक्रम संवत क्या है पढ़ें। चैत्र नवरात्रि में वैष्णो देवी, विंध्याचल और नैना देवी जैसे स्थानों पर भारी भीड़ रहती है, इसलिए यात्रा पहले से योजना बनाकर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना कब होती है?
घटस्थापना के लिए कौन सा समय सबसे अच्छा है?
क्या चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष से शुरू होती है?
कलश में क्या-क्या डालते हैं?
चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्र क्यों कहते हैं?
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