हिन्दू नव वर्ष
हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे नव संवत्सर या नवसंवत कहते हैं, क्योंकि इसी दिन विक्रम संवत का नया वर्ष शुरू होता है; महाराष्ट्र में यही गुड़ी पड़वा और कर्नाटक-आंध्र-तेलंगाना में उगादि है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी आरंभ होती है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
ब्रह्म पुराण की परंपरा में माना गया है कि ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसलिए यह दिन काल-गणना का पहला दिन है। उत्तर भारत में प्रचलित विक्रम संवत का नया वर्ष यहीं से गिना जाता है, और हर संवत्सर का एक नाम होता है, जैसे प्रभव, विभव आदि साठ नामों का चक्र। ध्यान दें, पूर्णिमांत पंचांग में चैत्र का महीना होली के अगले दिन से शुरू हो जाता है, पर नया वर्ष शुक्ल प्रतिपदा से ही बदलता है।
किस तिथि को
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो। सुबह चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना होती है, और नौवें दिन राम नवमी आती है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह स्नान के बाद घर पर ध्वजा या तोरण लगाना और ब्रह्मा जी, विष्णु जी व कुलदेवता की पूजा।
- नीम की कोमल पत्तियाँ मिश्री या गुड़ के साथ खाना, ताकि साल भर कड़वा-मीठा दोनों सहने की सीख मिले।
- मंदिर में या पंडित जी से नए संवत्सर का पंचांग सुनना, जिसमें साल का राजा, मंत्री और वर्षा का अनुमान बताया जाता है।
- कलश स्थापना करके नौ दिन देवी की पूजा।
क्षेत्रीय परंपराएँ
महाराष्ट्र में घर के बाहर बाँस पर रेशमी कपड़ा, नीम, फूलों की माला और उलटा कलश लगाकर गुड़ी खड़ी की जाती है। दक्षिण में उगादि पर छह स्वादों वाली उगादि पचड़ी बनती है। कश्मीरी पंडित इसे नवरेह कहते हैं। विक्रम संवत की गणना कैसे होती है, यह विक्रम संवत क्या है में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदू नव वर्ष कब होता है?
गुड़ी पड़वा, उगादि और नव संवत्सर में क्या अंतर है?
नव वर्ष पर नीम क्यों खाते हैं?
विक्रम संवत क्या है?
नव वर्ष के दिन क्या करें?
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