2026

पापमोचिनी एकादशी 2026

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पापमोचिनी एकादशी

पापमोचिनी एकादशी क्या है

पापमोचिनी यानी पापों से छुड़ाने वाली एकादशी। जाने-अनजाने हुई गलतियों के प्रायश्चित के लिए यह व्रत रखा जाता है। उत्तर भारत के विक्रम संवत में यह साल की आखिरी एकादशी होती है, क्योंकि इसके कुछ दिन बाद चैत्र नवरात्रि से नया संवत शुरू होता है।

किस तिथि को आती है

पूर्णिमांत पंचांग में यह चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो होली के बाद आती है। अमांत पंचांग में यही फाल्गुन कृष्ण एकादशी कहलाती है। व्रत सूर्योदय-व्यापिनी एकादशी पर रखा जाता है।

कथा संक्षेप में

चैत्ररथ वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी तपस्या कर रहे थे। कामदेव के भेजे जाने पर अप्सरा मंजुघोषा ने उनका तप भंग कर दिया और दोनों बरसों साथ रहे। जब मेधावी को होश आया तो उन्होंने क्रोध में मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का शाप दे दिया। फिर पिता च्यवन ने बताया कि गलती दोनों की है, और दोनों को चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत से मंजुघोषा शाप से छूटी और मेधावी का तेज लौट आया। पूरी कथा पापमोचनी एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।

कैसे मनाते हैं

सुबह स्नान के बाद मन में अपनी गलतियों को याद करके भगवान विष्णु से क्षमा माँगते हुए संकल्प लें। चतुर्भुज विष्णु की पूजा तुलसी, पीले फूल, धूप-दीप और फल से करें, कथा सुनें और ॐ जय जगदीश हरे गाएँ। दिन में किसी की निंदा, झूठ और क्रोध से बचना इस व्रत का असली नियम है। अगले दिन द्वादशी में पारण करें; विधि एकादशी पारण में है। इसके बाद नए संवत की पहली एकादशी कामदा एकादशी आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पापमोचिनी एकादशी कब है?
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण एकादशी को, होली और चैत्र नवरात्रि के बीच। अमांत में यह फाल्गुन कृष्ण एकादशी है।
इसे साल की आखिरी एकादशी क्यों कहते हैं?
विक्रम संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से बदलता है, इसलिए उससे पहले पड़ने वाली यह एकादशी संवत की अंतिम एकादशी होती है।
कथा में किसका उल्लेख है?
च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा का, जिन्होंने इस व्रत से शाप और पाप से मुक्ति पाई।
इस व्रत का मुख्य नियम क्या है?
अन्न त्याग के साथ मन की शुद्धि: क्रोध, झूठ और निंदा से बचना, और भगवान विष्णु से क्षमा माँगना।

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