अजा एकादशी
अजा एकादशी क्या है
अजा एकादशी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे अन्नदा एकादशी भी कहते हैं। इसकी कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है, इसलिए माना जाता है कि यह व्रत बड़े से बड़े दुख और कठिनाई से उबारता है और खोया हुआ मान-सम्मान लौटाता है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद कृष्ण एकादशी है — कृष्ण जन्माष्टमी के तीन दिन बाद। अमांत पंचांग में यही दिन श्रावण कृष्ण एकादशी कहलाता है, इसलिए दक्षिण और महाराष्ट्र के कैलेंडर में आपको यह सावन में लिखी मिलेगी।
राजा हरिश्चंद्र की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि वचन निभाने के लिए राजा हरिश्चंद्र ने राज्य दान कर दिया, पत्नी-पुत्र को बेच दिया और खुद श्मशान में चांडाल के यहाँ नौकरी करने लगे। वर्षों के दुख के बाद उनकी भेंट गौतम ऋषि से हुई, जिन्होंने भाद्रपद कृष्ण एकादशी — अजा — का व्रत बताया। व्रत के प्रभाव से उनके कष्ट दूर हुए, मृत पुत्र रोहिताश्व जीवित हुआ और राज्य व परिवार वापस मिला।
कैसे रखें
- दशमी को सात्त्विक एक समय का भोजन; एकादशी को सुबह स्नान कर संकल्प।
- विष्णु जी को तुलसी, पीले फूल, फल और धूप-दीप अर्पित करें, हरिश्चंद्र की कथा सुनें।
- रात को जागरण या भजन — कई परिवार जन्माष्टमी के झूले-झाँकी इसी दिन तक सजाए रखते हैं।
- अन्नदा नाम के अनुरूप द्वादशी को अन्न दान करके पारण करें।
फलाहार की सूची एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं, पारण का समय एकादशी पारण नियम में देखें, और मूल कथा एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अजा एकादशी कब आती है?
अजा एकादशी की कथा किससे जुड़ी है?
इसे अन्नदा एकादशी क्यों कहते हैं?
अजा एकादशी का फल क्या है?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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