वृश्चिक संक्रांति
वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं। सौर कैलेंडर में यहीं से मार्गशीर्ष, यानी अगहन (पंजाबी में मग्घर) महीना शुरू होता है। ठंड की शुरुआत इसी के साथ होती है।
पुण्य काल और पूजा
यह विष्णुपदी संक्रांति है, जिसमें संक्रमण से पहले का समय पुण्य काल माना जाता है; सटीक समय इस पृष्ठ पर है। स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दें और विष्णु की पूजा करें। अगहन को गीता में श्रीकृष्ण ने महीनों में अपना रूप बताया है ("मासानां मार्गशीर्षोऽहम्"), इसलिए यह भक्ति का महीना माना जाता है; इसके बारे में मार्गशीर्ष मास का महत्व में पढ़ें।
क्या दान करें
- सर्दी शुरू होने से कंबल, ऊनी कपड़े और रज़ाई का दान सबसे उपयोगी है।
- नया धान और गेहूँ बोने का समय होने से अन्न और बीज का दान भी शुभ माना गया है।
- गाय को हरा चारा और गुड़ देना भी इस दिन किया जाता है।
- सुबह की धूप में बैठकर सूर्य के बारह नामों का जप करना पुराने लोग इस मौसम का सबसे सरल नियम बताते हैं।
क्षेत्रीय परंपराएँ
केरल में वृश्चिकम महीने की पहली तारीख से सबरीमला का मंडल काल शुरू होता है, जब अय्यप्पा भक्त माला पहनकर इकतालीस दिन का कठोर व्रत रखते हैं। तमिलनाडु में कार्तिगै महीना शुरू होता है, जिसमें कार्तिगै दीपम जलाया जाता है। बंगाल में अग्रहायण में नई फसल का नबान्न उत्सव होता है। हर महीने की संक्रांति और महीनों के नाम अलग पृष्ठों पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृश्चिक संक्रांति से कौन सा महीना शुरू होता है?
वृश्चिक संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
सबरीमला का मंडल काल कब शुरू होता है?
वृश्चिक संक्रांति पर क्या दान करें?
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