वृषभ संक्रांति
वृषभ संक्रांति पर सूर्य मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। सौर कैलेंडर में यहीं से ज्येष्ठ (जेठ) महीना शुरू होता है, जो साल का सबसे गर्म समय है। इसलिए इस संक्रांति का दान-पुण्य भी पानी और छाया से जुड़ा है।
पुण्य काल
वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ की संक्रांति को विष्णुपदी संक्रांति कहा जाता है। इनमें संक्रमण से पहले का समय पुण्य काल माना जाता है, जो इस पृष्ठ पर दिया गया है। इसी समय स्नान, सूर्य को अर्घ्य और दान करना उत्तम है। संक्रांतियों के ये प्रकार संक्रांति क्या है लेख में समझाए गए हैं।
क्या करें
- सुबह तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएँ।
- जेठ की गर्मी को देखते हुए जल से भरा घड़ा, सुराही, पंखा, छाता, चप्पल और सत्तू का दान करें।
- उत्तर भारत में इस मौसम में प्याऊ लगाने और राहगीरों को शरबत पिलाने की पुरानी परंपरा है; संक्रांति इसकी शुरुआत का अच्छा दिन माना जाता है।
- वृषभ यानी बैल का संबंध नंदी और गोवंश से जोड़ा जाता है, इसलिए गाय-बैलों को चारा और पानी देना भी पुण्य माना गया है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
पंजाब-हिमाचल में यह जेठ की संगरांद है। बंगाल में ज्योइष्ठो, तमिलनाडु में वैकासी और केरल में इडवम महीना इसी दिन शुरू होता है; ओडिशा में इसे वृष संक्रांति कहते हैं। महीनों के नामों का मेल हिंदू महीनों के नाम में देखें, और हर महीने की संक्रांति की सूची अलग पृष्ठ पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृषभ संक्रांति से कौन सा महीना शुरू होता है?
वृषभ संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
वृषभ संक्रांति पर क्या दान करें?
क्या इस दिन व्रत रखना ज़रूरी है?
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