2026

विजया एकादशी 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

विजया एकादशी

विजया एकादशी क्या है

विजया एकादशी विजय दिलाने वाली एकादशी मानी जाती है। कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले यही व्रत किया था। इसलिए कोई कठिन काम, मुकदमा, परीक्षा या नया प्रयास शुरू करने वाले इस व्रत को खास श्रद्धा से रखते हैं।

किस तिथि को आती है

पूर्णिमांत पंचांग में यह फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो महाशिवरात्रि से कुछ दिन पहले आती है। अमांत पंचांग में यही माघ कृष्ण एकादशी लिखी जाती है। व्रत सूर्योदय के समय की एकादशी पर रखा जाता है।

कथा संक्षेप में

सीता जी की खोज में श्रीराम वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुँचे, पर अथाह सागर पार करने का कोई उपाय नहीं दिख रहा था। लक्ष्मण जी की सलाह पर वे पास के आश्रम में बकदाल्भ्य मुनि से मिले। मुनि ने फाल्गुन कृष्ण एकादशी का व्रत करने को कहा। श्रीराम ने विधि से व्रत किया, उसके बाद सेतु बना और लंका पर विजय हुई।

पूजा की विशेष विधि

कथा में बताई विधि के अनुसार दशमी को सोने, चाँदी, ताँबे या मिट्टी का कलश लेकर उसमें जल भरें और ऊपर पल्लव रखें। कलश के नीचे सात अनाज (सप्तधान्य) रखें और ऊपर जौ से भरा पात्र रखकर भगवान विष्णु या नारायण की प्रतिमा स्थापित करें। एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल और तुलसी से पूजा करें, रात में कलश के पास जागरण करें, और द्वादशी को कलश का दान कर पारण करें। आजकल अधिकतर घर सरल रूप में केवल विष्णु पूजा और कथा करते हैं। सामान्य कथा एकादशी व्रत कथा और आहार नियम एकादशी में क्या खाएँ में पढ़ें। कुछ दिन बाद महाशिवरात्रि आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजया एकादशी कब है?
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण एकादशी को; अमांत में यह माघ कृष्ण एकादशी कहलाती है।
विजया एकादशी का संबंध श्रीराम से क्यों है?
कथा के अनुसार बकदाल्भ्य मुनि की सलाह पर श्रीराम ने समुद्र पार करने से पहले यह व्रत किया था और फिर लंका पर विजय पाई।
इस व्रत में कलश क्यों रखते हैं?
परंपरागत विधि में सप्तधान्य पर कलश और उस पर जौ के पात्र में विष्णु प्रतिमा रखकर पूजा और रात्रि जागरण बताया गया है, और द्वादशी को कलश दान किया जाता है।
यह व्रत किस कामना से रखते हैं?
किसी कठिन काम में सफलता, शत्रु या विवाद पर विजय और बाधाएँ दूर करने की कामना से।

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