1। ॐ क्लीं ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः
2। ॐ क्लीं ॐ अंबिकायै नमः
3। ॐ क्लीं ॐ अंबालिकायै नमः
4। ॐ क्लीं ॐ अंबुधिशयनायै नमः
5। ॐ क्लीं ॐ अंबुधये नमः
6। ॐ क्लीं ॐ अंतकघ्न्यै नमः
7। ॐ क्लीं ॐ अंतकर्त्र्यै नमः
8। ॐ क्लीं ॐ अंतिमायै नमः
9। ॐ क्लीं ॐ अंतकरूपिण्यै नमः
10। ॐ क्लीं ॐ ईड्यायै नमः
11। ॐ क्लीं ॐ इभास्यनुतायै नमः
12। ॐ क्लीं ॐ ईशानप्रियायै नमः
13। ॐ क्लीं ॐ ऊत्यै नमः
14। ॐ क्लीं ॐ उद्यद्भानुकोटिप्रभायै नमः
15। ॐ क्लीं ॐ उदारांगायै नमः
16। ॐ क्लीं ॐ केलिपरायै नमः
17। ॐ क्लीं ॐ कलहायै नमः
18। ॐ क्लीं ॐ कांतलोचनायै नमः
19। ॐ क्लीं ॐ कांच्यै नमः
20। ॐ क्लीं ॐ कनकधारायै नमः
21। ॐ क्लीं ॐ कल्यै नमः
22। ॐ क्लीं ॐ कनककुंडलायै नमः
23। ॐ क्लीं ॐ खड्गहस्तायै नमः
24। ॐ क्लीं ॐ खट्वांगवरधारिण्यै नमः
25। ॐ क्लीं ॐ खेटहस्तायै नमः
26। ॐ क्लीं ॐ गंधप्रियायै नमः
27। ॐ क्लीं ॐ गोपसख्यै नमः
28। ॐ क्लीं ॐ गारुड्यै नमः
29। ॐ क्लीं ॐ गत्यै नमः
30। ॐ क्लीं ॐ गोहितायै नमः
31। ॐ क्लीं ॐ गोप्यायै नमः
32। ॐ क्लीं ॐ चिदात्मिकायै नमः
33। ॐ क्लीं ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः
34। ॐ क्लीं ॐ चतुराकृत्यै नमः
35। ॐ क्लीं ॐ चकोराक्ष्यै नमः
36। ॐ क्लीं ॐ चारुहासायै नमः
37। ॐ क्लीं ॐ गोवर्धनधरायै नमः
38। ॐ क्लीं ॐ गुर्व्यै नमः
39। ॐ क्लीं ॐ गोकुलाभयदायिन्यै नमः
40। ॐ क्लीं ॐ तपोयुक्तायै नमः
41। ॐ क्लीं ॐ तपस्विकुलवंदितायै नमः
42। ॐ क्लीं ॐ तापहारिण्यै नमः
43। ॐ क्लीं ॐ तार्क्षमात्रे नमः
44। ॐ क्लीं ॐ जयायै नमः
45। ॐ क्लीं ॐ जप्यायै नमः
46। ॐ क्लीं ॐ जरायवे नमः
47। ॐ क्लीं ॐ जवनायै नमः
48। ॐ क्लीं ॐ जनन्यै नमः
49। ॐ क्लीं ॐ जांबूनदविभूषायै नमः
50। ॐ क्लीं ॐ दयानिध्यै नमः
51। ॐ क्लीं ॐ ज्वालायै नमः
52। ॐ क्लीं ॐ जंभवधोद्यतायै नमः
53। ॐ क्लीं ॐ दुःखहंत्र्यै नमः
54। ॐ क्लीं ॐ दांतायै नमः
55। ॐ क्लीं ॐ द्रुतेष्टदायै नमः
56। ॐ क्लीं ॐ दात्र्यै नमः
57। ॐ क्लीं ॐ दीनार्तिशमनायै नमः
58। ॐ क्लीं ॐ नीलायै नमः
59। ॐ क्लीं ॐ नागेंद्रपूजितायै नमः
60। ॐ क्लीं ॐ नारसिंह्यै नमः
61। ॐ क्लीं ॐ नंदिनंदायै नमः
62। ॐ क्लीं ॐ नंद्यावर्तप्रियायै नमः
63। ॐ क्लीं ॐ निधये नमः
64। ॐ क्लीं ॐ परमानंदायै नमः
65। ॐ क्लीं ॐ पद्महस्तायै नमः
66। ॐ क्लीं ॐ पिकस्वरायै नमः
67। ॐ क्लीं ॐ पुरुषार्थप्रदायै नमः
68। ॐ क्लीं ॐ प्रौढायै नमः
69। ॐ क्लीं ॐ प्राप्त्यै नमः
70। ॐ क्लीं ॐ बलिसंस्तुतायै नमः
71। ॐ क्लीं ॐ बालेंदुशेखरायै नमः
72। ॐ क्लीं ॐ बंद्यै नमः
73। ॐ क्लीं ॐ बालग्रहविनाशन्यै नमः
74। ॐ क्लीं ॐ ब्राह्म्यै नमः
75। ॐ क्लीं ॐ बृहत्तमायै नमः
76। ॐ क्लीं ॐ बाणायै नमः
77। ॐ क्लीं ॐ ब्राह्मण्यै नमः
78। ॐ क्लीं ॐ मधुस्रवायै नमः
79। ॐ क्लीं ॐ मत्यै नमः
80। ॐ क्लीं ॐ मेधायै नमः
81। ॐ क्लीं ॐ मनीषायै नमः
82। ॐ क्लीं ॐ मृत्युमारिकायै नमः
83। ॐ क्लीं ॐ मृगत्वचे नमः
84। ॐ क्लीं ॐ योगिजनप्रियायै नमः
85। ॐ क्लीं ॐ योगांगध्यानशीलायै नमः
86। ॐ क्लीं ॐ यज्ञभुवे नमः
87। ॐ क्लीं ॐ यज्ञवर्धिन्यै नमः
88। ॐ क्लीं ॐ राकायै नमः
89। ॐ क्लीं ॐ राकेंदुवदनायै नमः
90। ॐ क्लीं ॐ रम्यायै नमः
91। ॐ क्लीं ॐ रणितनूपुरायै नमः
92। ॐ क्लीं ॐ रक्षोघ्न्यै नमः
93। ॐ क्लीं ॐ रतिदात्र्यै नमः
94। ॐ क्लीं ॐ लतायै नमः
95। ॐ क्लीं ॐ लीलायै नमः
96। ॐ क्लीं ॐ लीलानरवपुषे नमः
97। ॐ क्लीं ॐ लोलायै नमः
98। ॐ क्लीं ॐ वरेण्यायै नमः
99। ॐ क्लीं ॐ वसुधायै नमः
100। ॐ क्लीं ॐ वीरायै नमः
101। ॐ क्लीं ॐ वरिष्ठायै नमः
102। ॐ क्लीं ॐ शातकुंभमय्यै नमः
103। ॐ क्लीं ॐ शक्त्यै नमः
104। ॐ क्लीं ॐ श्यामायै नमः
105। ॐ क्लीं ॐ शीलवत्यै नमः
106। ॐ क्लीं ॐ शिवायै नमः
107। ॐ क्लीं ॐ होरायै नमः
108। ॐ क्लीं ॐ हयगायै नमः
इति श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावळिः संपूर्णं ॥
अर्थ
श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः विजय प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावलि केवल बाहरी विजयों के लिए नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति, साहस और सत्य की विजय के लिए भी एक दिव्य स्तोत्र है। यह भक्तों को भय, संदेह और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त करने में मदद करता है। देवी लक्ष्मी का यह विजय स्वरूप भक्तों के जीवन में साहस, स्थिरता और सफलता लाने में सक्षम है।
विजयलक्ष्मी धर्म की विजय और सत्य में विश्वास का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस नामावलि का प्रत्येक नाम देवी की अपार शक्ति, पराक्रम, ज्ञान और दिव्य विजय को दर्शाता है। "विजयलक्ष्मी" नाम केवल जीत का संकेत नहीं देता, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का भी सूचक है। आध्यात्मिक रूप से, यह आंतरिक विजय को - मन के विकारों पर विजय को - प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
ये 108 नाम देवी के विभिन्न गुणों, रूपों और शक्तियों का वर्णन करते हैं। उदाहरण के लिए, 'अंबिकायै', 'अंबालिकायै' नाम देवी के मातृ स्वरूप को, 'अंबुधिशयनायै' नाम भगवान विष्णु के साथ उनके संबंध को, और 'उद्यद्भानुकोटिप्रभायै' नाम करोड़ों सूर्यों के समान उनकी प्रभा का वर्णन करता है। प्रत्येक नाम देवी की शक्ति के एक पहलू को प्रकट करता है, भक्तों को आशीर्वाद और सुरक्षा प्रदान करता है। इन नामों के पाठ से भक्त देवी की सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता का अनुभव करते हैं।
प्रतिदिन इस नामावलि का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से भक्तों के हृदय में साहस, आत्मविश्वास, प्रतिबद्धता और धर्म-आधारित धैर्य बढ़ता है। यह पापों का निवारण, कार्यों में सिद्धि, प्रतियोगिताओं में विजय, नौकरी में स्थिरता, शिक्षा में सफलता और जीवन में आने वाले आंतरिक व बाहरी शत्रुओं के उन्मूलन में सहायक होता है। यह नामावलि केवल लौकिक सफलता ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक उत्थान भी प्रदान करती है। विजयलक्ष्मी देवी के आशीर्वाद से, भक्त अहंकार रहित सफलता और लालच रहित समृद्धि प्राप्त करते हैं।
लाभ (Benefits):
- कार्य सिद्धि: किसी भी कार्य को शुरू करने पर उसमें सफलता प्राप्त करने में सहायता मिलती है और बाधाएं दूर होती हैं।
- शत्रु विजय: आंतरिक (भय, अज्ञान) और बाहरी शत्रुओं (प्रतिद्वंद्वी, नकारात्मक शक्तियाँ) पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: भक्तों के मन से भय दूर होता है और अटल आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प विकसित होता है।
- मानसिक शांति: प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है, चिंता कम होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा देता है, आंतरिक विजय प्राप्त करने में मार्गदर्शन करता है और सत्य का बोध कराता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ करने के मुख्य लाभ क्या हैं?
श्री विजयलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का कितनी बार जप करना चाहिए?
इस नामावलि का उद्गम या स्रोत क्या है?
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