2026

ज्येष्ठ अमावस्या 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

ज्येष्ठ अमावस्या

ज्येष्ठ अमावस्या क्यों ख़ास है

ज्येष्ठ अमावस्या उत्तर भारत में दो बड़े व्रत-पर्वों का दिन है: सुहागिन स्त्रियों का वट सावित्री व्रत और शनि देव का जन्मोत्सव, शनि जयंती। इसलिए इस अमावस्या पर सुबह से बरगद के पेड़ों के नीचे पूजा करती महिलाएँ और शाम को शनि मंदिरों में तेल चढ़ाते भक्त, दोनों दिखाई देते हैं।

किस तिथि को

पूर्णिमांत पंचांग में यह ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या है। अमांत पंचांग में यही तिथि वैशाख अमावस्या कहलाती है, इसलिए दक्षिण भारत के कैलेंडर में आपको वैशाख लिखा मिल सकता है। सामान्य स्नान-दान के लिए सूर्योदय के समय की अमावस्या ली जाती है।

वट सावित्री व्रत

बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली की महिलाएँ इस दिन पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, बरगद की पूजा करके कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। पूरी कथा वट सावित्री व्रत कथा में और व्रत का विस्तार वट सावित्री व्रत पृष्ठ पर है। महाराष्ट्र और गुजरात में यही व्रत पंद्रह दिन बाद ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में होता है।

शनि जयंती

मान्यता है कि सूर्य देव और छाया के पुत्र शनि देव का जन्म इसी अमावस्या को हुआ। भक्त शनि मंदिर में सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द और नीले फूल चढ़ाते हैं, शनि चालीसा पढ़ते हैं और ज़रूरतमंदों को जूते-चप्पल, छाता या काला कपड़ा दान करते हैं। दिल्ली-एनसीआर और कोकिलावन (मथुरा) के शनि धाम में इस दिन भारी भीड़ रहती है। शनि जयंती का पूरा विवरण शनि जयंती पृष्ठ पर देखें।

अन्य परंपराएँ

तेज़ गर्मी के कारण जल-दान, शरबत और सत्तू बाँटना, और पितरों का तर्पण भी इस दिन किया जाता है। शनि से जुड़ी साप्ताहिक उपासना के लिए शनिवार व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठ अमावस्या पर कौन से पर्व आते हैं?
उत्तर भारत में इस दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती दोनों मनाए जाते हैं।
ज्येष्ठ अमावस्या को दक्षिण के कैलेंडर में वैशाख अमावस्या क्यों लिखा होता है?
अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर पूरा होता है, इसलिए वहाँ यही तिथि वैशाख मास की अमावस्या गिनी जाती है। दिन एक ही है।
शनि जयंती पर क्या चढ़ाएं?
सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द, नीले या काले फूल और लोहे की कोई छोटी वस्तु चढ़ाने की परंपरा है। साथ में शनि मंत्र या चालीसा का पाठ करें।
वट सावित्री व्रत में बरगद की कितनी परिक्रमा करते हैं?
ज़्यादातर घरों में कच्चा सूत लपेटते हुए सात परिक्रमा की जाती है; कुछ परिवार 108 परिक्रमा भी करते हैं।
इस दिन क्या दान करें?
गर्मी के कारण जल, शरबत, सत्तू, छाता और चप्पल का दान अच्छा माना जाता है। शनि जयंती के कारण काला कपड़ा और तेल भी दिया जाता है।

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