श्रावण पुत्रदा एकादशी
श्रावण पुत्रदा एकादशी क्या है
श्रावण पुत्रदा एकादशी सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी है। "पुत्रदा" यानी संतान देने वाली — जिन दंपतियों को संतान की इच्छा है, वे यह व्रत विशेष श्रद्धा से रखते हैं, और माता-पिता संतान के सुख के लिए भी। साल में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं; दूसरी पौष पुत्रदा एकादशी है। इसे पवित्रा एकादशी भी कहते हैं।
किस तिथि को
श्रावण शुक्ल एकादशी — रक्षाबंधन से चार दिन पहले। शुक्ल पक्ष होने से दोनों पंचांगों में महीना एक ही है। व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो।
राजा महीजित की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि माहिष्मती के धर्मात्मा राजा महीजित संतानहीन थे। प्रजा ने लोमश ऋषि से कारण पूछा। ऋषि ने ध्यान लगाकर बताया कि पिछले जन्म में व्यापारी रहते हुए राजा ने एक प्यासी गाय को तालाब से पानी पीने से हटा दिया था। उपाय के रूप में प्रजा ने सावन शुक्ल एकादशी का व्रत रखा और उसका पुण्य राजा को अर्पित किया — समय पर रानी ने पुत्र को जन्म दिया।
कैसे रखें
- पति-पत्नी साथ संकल्प लें और बाल गोपाल या विष्णु जी की पूजा करें।
- पंचामृत से स्नान, पीले फूल, तुलसी और माखन-मिश्री का भोग।
- गाय को चारा और जल देना इस कथा के भाव से जुड़ा है।
- पुष्टिमार्गीय मंदिरों में इस दिन ठाकुर जी को पवित्रा (रेशमी धागे की माला) धारण कराई जाती है।
फलाहार के लिए एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं और लड्डू गोपाल की सेवा के लिए लड्डू गोपाल सेवा के नियम देखें। मूल कथा एकादशी व्रत कथा में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण पुत्रदा एकादशी कब आती है?
पुत्रदा एकादशी साल में कितनी बार आती है?
यह व्रत कौन रखता है?
पुत्रदा एकादशी की कथा क्या है?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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