रमा एकादशी
रमा एकादशी क्या है
रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो दिवाली से चार दिन पहले आती है। "रमा" माँ लक्ष्मी का नाम है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी जी की भी पूजा होती है। दिवाली के उत्सवों की शुरुआत से ठीक पहले का यह व्रत घर में सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह कार्तिक कृष्ण एकादशी है — अहोई अष्टमी के तीन दिन बाद और धनतेरस से दो दिन पहले। अमांत पंचांग में यही दिन आश्विन कृष्ण एकादशी कहलाता है। अगले दिन गोवत्स द्वादशी पड़ती है।
चंद्रभागा और शोभन की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि राजा मुचुकुंद के राज्य में एकादशी को कोई अन्न नहीं खाता था। उनकी बेटी चंद्रभागा का पति शोभन शरीर से कमज़ोर था, फिर भी उसने व्रत किया और भूख सहन न होने से उसके प्राण चले गए। व्रत के पुण्य से उसे मंदराचल पर्वत पर सुंदर नगर मिला, पर वह अस्थिर था। बाद में चंद्रभागा ने अपनी वर्षों की एकादशियों का पुण्य पति को दिया, और वह नगर स्थिर हो गया।
कैसे रखें
- विष्णु जी और लक्ष्मी जी को कमल, तुलसी, खीर या मखाने का भोग।
- शाम को घर के मंदिर और तुलसी के पास दीपक — कई घरों में दिवाली के दीयों की शुरुआत इसी दिन से होती है।
- लक्ष्मी जी की आरती और विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
- द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण।
कथा का संदेश यह भी है कि शरीर की क्षमता देखकर ही व्रत का प्रकार चुनें। फलाहार के लिए एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं और मूल कथा एकादशी व्रत कथा में पढ़ें। दिवाली की तैयारी के लिए दीपावली पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रमा एकादशी कब आती है?
रमा एकादशी पर किसकी पूजा होती है?
रमा एकादशी की कथा क्या है?
रमा एकादशी का फल क्या है?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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