2026

परम एकादशी 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

परम एकादशी

परम एकादशी क्या है

परम एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। पद्मिनी एकादशी की तरह यह भी केवल उन्हीं वर्षों में आती है जिनमें अधिक मास जुड़ता है। मान्यता है कि यह व्रत दरिद्रता दूर करता है और श्रद्धा से करने वाले को धन, सुख और परम गति देता है, इसी से नाम परम पड़ा।

किस तिथि को आती है

अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को। अधिक मास हर बार अलग महीने के साथ जुड़ता है, इसलिए इसका महीना तय नहीं होता। ऊपर दी गई तिथि उसी साल के अधिक मास के अनुसार है। विस्तार के लिए अधिक मास क्या है पढ़ें।

कथा संक्षेप में

काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम का धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ बड़ी गरीबी में रहता था। पवित्रा भूखी रहकर भी अतिथि को खाली हाथ नहीं लौटाती थी। तंग आकर सुमेधा परदेस जाने की सोचने लगा, तभी कौण्डिन्य मुनि उनके घर आए। मुनि ने अधिक मास की कृष्ण एकादशी, परम एकादशी, का व्रत बताया। दोनों ने विधि से व्रत किया और उनके घर सुख-समृद्धि लौट आई।

कैसे मनाते हैं

सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा तुलसी, पीले फूल, धूप, दीप और नैवेद्य से करें। कुछ श्रद्धालु इसके साथ पाँच दिन का पंचरात्रि व्रत भी रखते हैं, यानी एकादशी से पाँच दिन तक संयम और उपवास। इस एकादशी पर अन्न, वस्त्र और विशेषकर गरीब ब्राह्मण या ज़रूरतमंद परिवार की मदद करना कथा की भावना के अनुरूप है। पारण अगले दिन द्वादशी में करें; आहार नियम एकादशी में क्या खाएँ में हैं। शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और सामान्य एकादशी व्रत कथा भी देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परम एकादशी कब आती है?
केवल अधिक मास वाले वर्ष में, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को।
परम एकादशी का फल क्या है?
मान्यता है कि यह व्रत दरिद्रता दूर करता है और सुख-समृद्धि के साथ परम गति देता है।
कथा में किसका वर्णन है?
काम्पिल्य नगर के गरीब ब्राह्मण सुमेधा और उनकी पत्नी पवित्रा का, जिन्हें कौण्डिन्य मुनि ने यह व्रत बताया।
पंचरात्रि व्रत क्या है?
कुछ श्रद्धालु परम एकादशी से शुरू करके पाँच दिन तक संयम और उपवास रखते हैं, जिसे पंचरात्रि व्रत कहते हैं। यह अनिवार्य नहीं है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...