मोहिनी एकादशी
मोहिनी एकादशी क्या है
मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी है। परंपरा इसे भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जोड़ती है — समुद्र मंथन के बाद मोहिनी रूप धरकर उन्होंने देवताओं को अमृत बाँटा था। माना जाता है कि यह व्रत मोह के बंधन और पुराने पापों से छुटकारा दिलाता है।
किस तिथि को
वैशाख शुक्ल एकादशी — शुक्ल पक्ष होने से पूर्णिमांत और अमांत, दोनों में यही नाम। यह अक्षय तृतीया के आठ दिन बाद और बुद्ध पूर्णिमा से चार दिन पहले आती है। व्रत सूर्योदय-व्यापिनी एकादशी पर रखा जाता है।
मोहिनी एकादशी की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को वह प्रसंग सुनाते हैं जो वशिष्ठ जी ने सीता-वियोग से दुखी श्रीराम को बताया था। सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नगरी में धनपाल नाम के धर्मात्मा वैश्य का पाँचवाँ बेटा धृष्टबुद्धि जुए और बुरी संगत में सब कुछ गँवा बैठा। घर से निकाला गया, भटकता हुआ वह कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत बताया, जिससे उसके पाप नष्ट हुए और अंत समय उसे विष्णुलोक मिला।
कैसे रखें
- सुबह स्नान कर विष्णु जी को चंदन, पीले फूल, तुलसी और ऋतुफल — खरबूजा, आम — चढ़ाएँ।
- दिन भर फलाहार या निर्जल व्रत; रात को भजन-कीर्तन।
- वैशाख की गर्मी में जल से भरा घड़ा, पंखा या शरबत दान करना इस दिन खास माना जाता है।
- द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण।
खाने-पीने के नियम एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं में देखें, मूल कथा एकादशी व्रत कथा में पढ़ें, और शाम को ॐ जय जगदीश हरे गाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोहिनी एकादशी कब आती है?
मोहिनी एकादशी का नाम कैसे पड़ा?
मोहिनी एकादशी की कथा किसकी है?
इस दिन क्या दान करें?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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