मेष संक्रांति
मेष संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मीन से मेष राशि में आते हैं। यह सौर वर्ष का पहला दिन है, यानी सौर नववर्ष, और इसी दिन खरमास भी समाप्त होता है। पंजाब की बैसाखी, बिहार-झारखंड का सतुआनी और देश के कई हिस्सों के नए साल इसी संक्रांति पर पड़ते हैं।
क्या है और कब
चंद्र पंचांग का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है (हिंदू नव वर्ष), जबकि सौर गणना वाले क्षेत्रों का नया साल मेष संक्रांति से शुरू होता है। सौर कैलेंडर में यहीं से वैसाख महीना शुरू होता है। मेष और तुला की संक्रांति को विषुव संक्रांति कहा जाता है; इनमें संक्रमण के पहले और बाद, दोनों ओर का समय पुण्य माना जाता है। विक्रम संवत और नववर्ष के अंतर पर यह लेख देखें।
कैसे मनाते हैं
सुबह नदी या घर पर स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। गर्मी शुरू हो चुकी होती है, इसलिए जल से भरा मिट्टी का घड़ा, पंखा, सत्तू, गुड़ और मौसमी फल दान करने की परंपरा है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
- बैसाखी: पंजाब-हरियाणा में रबी की फसल कटने का उत्सव; सिख परंपरा में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।
- सतुआनी: बिहार, झारखंड और पूर्वांचल में चने का सत्तू, गुड़ और कच्चे आम (टिकोला) खाए और दान किए जाते हैं। मिथिला में अगले दिन जुड़ शीतल मनाते हैं, जब बड़े छोटों के सिर पर ठंडा पानी डालकर आशीर्वाद देते हैं।
- बंगाल में पोइला बोइशाख, असम में बोहाग बिहू, ओडिशा में पना संक्रांति, केरल में विषु और तमिलनाडु में पुथांडु इसी समय मनाए जाते हैं।
खरमास खत्म होने के साथ विवाह के मुहूर्त फिर खुलते हैं; विस्तार खरमास के नियम में है। हर महीने की संक्रांति की सूची मासिक संक्रांति पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेष संक्रांति को सौर नववर्ष क्यों कहते हैं?
बैसाखी और मेष संक्रांति क्या एक ही दिन हैं?
सतुआनी में क्या करते हैं?
क्या मेष संक्रांति पर खरमास खत्म हो जाता है?
मेष संक्रांति पर क्या दान करें?
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