मीन संक्रांति
मीन संक्रांति पर सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते हैं। यह सौर वर्ष की आखिरी संक्रांति है और इसी दिन से साल का दूसरा खरमास (मलमास) शुरू होता है, जो मेष संक्रांति तक चलता है। सौर कैलेंडर में यहीं से चैत्र महीना शुरू होता है।
खरमास और शुभ कार्य
धनु की तरह मीन राशि के स्वामी भी बृहस्पति हैं, इसलिए सूर्य के यहाँ रहने पर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कार टाले जाते हैं। यह खरमास अक्सर होली के आसपास शुरू होता है और चैत्र नवरात्रि आम तौर पर इसी के भीतर पड़ती है। इससे कोई उलझन नहीं होनी चाहिए: पूजा-पाठ और त्योहार खरमास में मना नहीं हैं, रोक सिर्फ़ मांगलिक संस्कारों पर है। नियमों का विस्तार खरमास क्या है में और गृह प्रवेश के मुहूर्त पर यह लेख देखें।
पूजा और दान
संक्रांति के दिन स्नान करके सूर्य को लाल फूल और अक्षत मिले जल से अर्घ्य दें और विष्णु की पूजा करें। मीन, धनु, मिथुन और कन्या संक्रांति को षडशीति संक्रांति कहा जाता है, जिनमें संक्रमण के बाद का समय पुण्य माना जाता है। मौसम बदल रहा होता है, इसलिए अन्न, वस्त्र और भूमि-दान की बात पुराने ग्रंथों में मिलती है; आज के समय में भोजन और कपड़ों का दान सबसे सरल है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
तमिलनाडु में पंगुनि और केरल में मीनम महीना यहीं से शुरू होता है; पंगुनि उत्तिरम जैसे बड़े मंदिर उत्सव इसी महीने आते हैं। पंजाब-हिमाचल में यह चेत की संगरांद है। एक महीने बाद मेष संक्रांति पर सौर नववर्ष और खरमास का अंत होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मीन संक्रांति से खरमास कब तक रहता है?
क्या खरमास में होली और नवरात्रि मना सकते हैं?
मीन संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
मीन संक्रांति से कौन सा सौर महीना शुरू होता है?
इस दिन क्या करें?
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