2026

सर्वपितृ अमावस्या 2026

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मुख्य विवरण

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सर्वपितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या क्या है

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे बड़ा श्राद्ध दिवस है। इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि याद न हो, जिनका श्राद्ध किसी कारण छूट गया हो, या जिनका देहांत अमावस्या को हुआ हो। इसीलिए इसे सबके पितरों का दिन, यानी सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। दक्षिण और पश्चिम भारत में इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है।

किस तिथि को और किस समय

उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह आश्विन कृष्ण अमावस्या है; अमांत पंचांग में इसे भाद्रपद अमावस्या कहते हैं। श्राद्ध के लिए सूर्योदय नहीं, बल्कि अपराह्न काल (दोपहर बाद का भाग) देखा जाता है: जिस दिन अपराह्न में अमावस्या हो, उसी दिन श्राद्ध होता है। कुतप और रौहिण मुहूर्त, जो दोपहर के आसपास होते हैं, श्राद्ध के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं। इसी कारण इस पृष्ठ की तारीख़ कभी-कभी सामान्य आश्विन अमावस्या से एक दिन पहले हो सकती है।

श्राद्ध कैसे करते हैं

  1. सुबह स्नान, फिर दक्षिण की ओर मुख करके कुश, काले तिल और जल से तर्पण।
  2. दोपहर में घर पर बना सात्विक भोजन, जिसमें खीर, पूड़ी और मौसमी सब्ज़ी होती है; प्याज़-लहसुन नहीं।
  3. पंचबलि: गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन का अंश अलग निकालना।
  4. ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराकर वस्त्र और दक्षिणा देना।
  5. शाम को द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर पितरों से विदा की प्रार्थना।

विस्तृत विधि पितृ पक्ष श्राद्ध विधि में है। पितृ पक्ष की शुरुआत पितृ पक्ष आरम्भ पृष्ठ पर देखें।

क्षेत्रीय परंपराएँ

गया (बिहार) में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान का मेला इसी दिन पूरा होता है, और हरिद्वार, प्रयागराज, काशी के घाटों पर तर्पण करने वालों की भीड़ रहती है। अगली सुबह नवरात्रि की घटस्थापना होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वपितृ अमावस्या पर किसका श्राद्ध करते हैं?
जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, जिनका श्राद्ध छूट गया हो या जिनका देहांत अमावस्या को हुआ हो, उन सबका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध किस समय करें?
दोपहर के कुतप और रौहिण मुहूर्त में, अपराह्न काल समाप्त होने से पहले। सुबह जल्दी या शाम के बाद श्राद्ध नहीं किया जाता।
श्राद्ध के भोजन में क्या बनाएं?
खीर, पूड़ी, मौसमी सब्ज़ी और दाल जैसा सात्विक भोजन बनाया जाता है। प्याज़, लहसुन और मसूर आदि से परहेज़ रखा जाता है; पितर को जो प्रिय था वह भी बना सकते हैं।
अगर पंडित न मिलें तो श्राद्ध कैसे करें?
घर का पुरुष या महिला स्वयं तर्पण करके पंचबलि निकाल सकते हैं और किसी ज़रूरतमंद को भोजन व दान दे सकते हैं। भाव और श्रद्धा को ही मुख्य माना गया है।
महालया अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या में क्या अंतर है?
दोनों एक ही दिन के नाम हैं। उत्तर भारत में सर्वपितृ अमावस्या और दक्षिण, पश्चिम व बंगाल में महालया अमावस्या कहा जाता है।

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