कामिका एकादशी
कामिका एकादशी क्या है
कामिका एकादशी सावन (श्रावण) कृष्ण पक्ष की एकादशी है — उत्तर भारत में सावन की पहली एकादशी और चातुर्मास की भी पहली। इस दिन भगवान विष्णु की तुलसी दल से पूजा और घी का दीपक जलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने में हुए बड़े पापों का भी प्रायश्चित करा देता है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह श्रावण कृष्ण एकादशी है; अमांत पंचांग में यही दिन आषाढ़ कृष्ण एकादशी कहलाता है। इसलिए महाराष्ट्र-गुजरात के कैलेंडर में आपको यह आषाढ़ में लिखी मिलेगी। यह गुरु पूर्णिमा के ग्यारह दिन बाद आती है।
कामिका एकादशी की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को वह संवाद सुनाते हैं जिसमें ब्रह्मा जी ने नारद को इस व्रत का माहात्म्य बताया था: जो इस दिन तुलसी से विष्णु की पूजा करता है, उसे गंगा स्नान और तीर्थयात्रा जैसा पुण्य मिलता है। लोक में एक कथा भी प्रचलित है — एक ठाकुर ने झगड़े में एक ब्राह्मण की हत्या कर दी; पछतावे में जब उसने प्रायश्चित पूछा तो मुनि ने कामिका एकादशी बताई, और व्रत से उसका पाप धुल गया।
कैसे रखें
- सुबह स्नान के बाद विष्णु जी को पीले फूल, फल और तुलसी की मंजरी चढ़ाएँ; तुलसी का दर्शन और जल देना शुभ है (पर एकादशी को तुलसी के पत्ते न तोड़ें, एक दिन पहले तोड़ लें)।
- शाम को घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
- सावन होने से कई भक्त इसी दिन शिवलिंग पर जल भी चढ़ाते हैं।
सावन के बाकी नियम सावन मास के नियम में और तुलसी से जुड़ी सावधानियाँ तुलसी के नियम में हैं। फलाहार के लिए एकादशी में क्या खाएं और मूल कथा के लिए एकादशी व्रत कथा देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कामिका एकादशी कब आती है?
कामिका एकादशी पर क्या खास करें?
क्या एकादशी को तुलसी तोड़ सकते हैं?
कामिका एकादशी का फल क्या है?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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