ज्येष्ठ पूर्णिमा
ज्येष्ठ पूर्णिमा क्या है
ज्येष्ठ पूर्णिमा भीषण गर्मी के महीने ज्येष्ठ की पूर्णिमा है, और इसी दिन कई अलग-अलग परंपराएँ एक साथ मिलती हैं: संत कबीर दास की जयंती, पुरी में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा, और महाराष्ट्र-गुजरात में वट पूर्णिमा का व्रत। उत्तर भारत में यह गंगा स्नान, जल-दान और सत्यनारायण कथा का दिन है।
किस तिथि को
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा, जो मई-जून में आती है। शुक्ल पक्ष की तिथि होने से इसका नाम दोनों पंचांगों में एक ही है। स्नान-दान के लिए सूर्योदय वाली पूर्णिमा, और पूर्णिमा व्रत के लिए चंद्रोदय के समय की पूर्णिमा देखी जाती है।
कैसे मनाते हैं
- कबीर जयंती: काशी के लहरतारा और कबीर चौरा, और मगहर में कबीरपंथी समाज भजन-कीर्तन और सत्संग करता है; घरों में कबीर के दोहे पढ़े जाते हैं।
- स्नान यात्रा: पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान लगभग पंद्रह दिन अनवसर में रहते हैं और फिर रथयात्रा निकलती है।
- वट पूर्णिमा: महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक की सुहागिनें इस दिन बरगद की पूजा करती हैं; उत्तर भारत में यही व्रत पंद्रह दिन पहले अमावस्या को वट सावित्री व्रत के रूप में रखा जाता है। कथा वट सावित्री व्रत कथा में पढ़ें।
- जल-दान: प्याऊ लगाना, घड़ा, सत्तू, पंखा और छाता दान करना।
आगे-पीछे के पर्व
इसी शुक्ल पक्ष में दशमी को गंगा दशहरा और एकादशी को निर्जला एकादशी आती है, इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा इन दोनों बड़े स्नान-व्रतों के कुछ ही दिन बाद पड़ती है। पूर्णिमांत पंचांग में अगले दिन से आषाढ़ का कृष्ण पक्ष शुरू हो जाता है, और फिर आषाढ़ अमावस्या के बाद गुप्त नवरात्रि और रथयात्रा का क्रम आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कौन से पर्व आते हैं?
वट पूर्णिमा और वट सावित्री व्रत में क्या अंतर है?
जगन्नाथ स्नान यात्रा क्या है?
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर क्या दान करें?
कबीर जयंती कब होती है?
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