निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी क्या है
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसमें सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक पानी भी नहीं पिया जाता। इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि यह एक व्रत साल की सारी चौबीस एकादशियों का फल दे देता है।
किस तिथि को
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी, गंगा दशहरा के अगले दिन। शुक्ल पक्ष होने से दोनों पंचांगों में महीना एक ही है। साल की सबसे लंबी और गर्म तारीख़ों के आसपास पड़ने से यह सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है।
भीमसेन की कथा
पुराण परंपरा में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को यह प्रसंग सुनाते हैं। भीम से भूख सहन नहीं होती थी, इसलिए वे हर एकादशी नहीं रख पाते थे। उन्होंने व्यास जी से उपाय पूछा। व्यास जी ने कहा — ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को बिना जल के व्रत करो, तो सब एकादशियों का पुण्य मिल जाएगा। पूरी कथा निर्जला एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।
कैसे मनाते हैं
- सुबह स्नान-संकल्प के बाद केवल आचमन का जल, उसके बाद द्वादशी के सूर्योदय तक जल नहीं।
- मिट्टी के घड़े में जल भरकर, ऊपर शक्कर, फल और पंखा रखकर दान करना इस दिन की सबसे खास परंपरा है।
- दिल्ली, यूपी और पंजाब में जगह-जगह मीठे शरबत की छबील लगती है।
- छाता, जूते, सत्तू और आम का दान भी किया जाता है।
जो बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती या दवा पर हैं, वे जल या फल लेकर व्रत रखें — शास्त्र भी असमर्थ के लिए छूट देते हैं। पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद; नियम एकादशी पारण में और खाने-पीने की बातें एकादशी में क्या खाएं में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निर्जला एकादशी कब आती है?
इसे भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?
क्या निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं?
निर्जला एकादशी पर क्या दान करें?
व्रत कब खोलें?
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