जया एकादशी
जया एकादशी क्या है
जया एकादशी माघ महीने की शुक्ल एकादशी है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह व्रत भूत-पिशाच जैसी नीच योनियों से छुटकारा दिलाता है। माघ स्नान के इस पवित्र महीने में प्रयागराज और काशी में इस दिन गंगा स्नान के बाद व्रत रखने वालों की भीड़ रहती है। दक्षिण और कुछ जगहों पर इसे भीष्म एकादशी भी कहते हैं।
किस तिथि को आती है
यह माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो वसंत पंचमी के छह दिन बाद आती है। शुक्ल पक्ष होने के कारण दोनों पंचांगों में महीना माघ ही रहता है। व्रत सूर्योदय-व्यापिनी एकादशी पर होता है।
कथा संक्षेप में
इंद्र की सभा में उत्सव चल रहा था। गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती एक-दूसरे पर मोहित होकर गायन-नृत्य में चूक करने लगे। क्रोधित इंद्र ने उन्हें पिशाच बनकर पृथ्वी पर रहने का शाप दिया। हिमालय की ठंड में दुखी होकर उन्होंने माघ शुक्ल एकादशी को कुछ नहीं खाया और पूरी रात जागते हुए भगवान को याद करते रहे। अनजाने में हुए इस व्रत से अगले दिन वे शाप से मुक्त होकर फिर स्वर्ग लौट गए।
पूजा कैसे करें
सुबह स्नान, संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में, फिर भगवान विष्णु को तुलसी, धूप, दीप, पीले फूल, तिल और फल चढ़ाएँ। विष्णु सहस्रनाम या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें और कथा सुनें। रात्रि जागरण इस एकादशी में विशेष माना गया है। पारण के नियम एकादशी पारण में देखें। इसी पखवाड़े वसंत पंचमी भी आती है। अन्य एकादशियाँ एकादशी कैलेंडर पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जया एकादशी किस महीने में आती है?
जया एकादशी का फल क्या है?
कथा में किसे शाप मिला था?
इस दिन क्या करें?
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