इंदिरा एकादशी
इंदिरा एकादशी क्या है
इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो पितृ पक्ष के बीच पड़ती है। यह अकेली एकादशी है जिसका पूरा भाव पितरों से जुड़ा है — मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य अर्पित करने से पूर्वजों को सद्गति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा होती है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह आश्विन कृष्ण एकादशी है; अमांत पंचांग में यही दिन भाद्रपद कृष्ण एकादशी कहलाता है। दोनों में यह पितृ पक्ष के भीतर ही रहती है, और इसी दिन एकादशी का श्राद्ध भी किया जाता है।
राजा इंद्रसेन की कथा
पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि माहिष्मती के राजा इंद्रसेन की सभा में एक दिन नारद मुनि आए और बताया कि उन्होंने यमलोक में राजा के पिता को देखा है — किसी पुराने व्रत-भंग के कारण वे वहाँ कष्ट में थे और पुत्र से इंदिरा एकादशी का व्रत करने का संदेश भेजा था। राजा ने नारद जी की बताई विधि से परिवार सहित व्रत किया और पुण्य पिता को अर्पित किया; उनके पिता को विष्णुलोक मिला।
कैसे रखें
- दशमी को दोपहर में एक बार भोजन, नदी या घर पर पितरों का तर्पण।
- एकादशी को शालिग्राम पूजा, फिर दोपहर में पितरों के निमित्त श्राद्ध — व्रती स्वयं अन्न नहीं खाता, पर ब्राह्मण, गाय और कौए के लिए भोजन निकाला जाता है।
- रात को जागरण और द्वादशी को दान देकर पारण।
तर्पण-श्राद्ध की पूरी विधि पितृ पक्ष श्राद्ध विधि में है। फलाहार के लिए एकादशी में क्या खाएं और मूल कथा एकादशी व्रत कथा देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंदिरा एकादशी कब आती है?
इंदिरा एकादशी का पितरों से क्या संबंध है?
क्या इस दिन श्राद्ध कर सकते हैं?
इंदिरा एकादशी पर किसकी पूजा होती है?
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
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