चैत्र नवरात्रि: कूष्मांडा पूजा
चैत्र नवरात्रि में कूष्मांडा पूजा
चैत्र शुक्ल चतुर्थी, चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन, माँ कूष्मांडा की पूजा का दिन है। माना जाता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि रची। इसी तिथि पर हर महीने की तरह विनायक चतुर्थी भी पड़ती है, इसलिए कई घरों में आज गणेश जी को भी दूर्वा और मोदक चढ़ाए जाते हैं।
कथा और स्वरूप
सृष्टि से पहले जब चारों ओर अंधेरा था, तब माँ की हल्की हँसी से ब्रह्मांड का अंड बना और प्रकाश फैला, इसलिए वे आदिशक्ति और कूष्मांडा कहलाईं। उनका निवास सूर्य मंडल में माना जाता है। आठ भुजाएँ हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और सिद्धियों वाली जपमाला है; वाहन सिंह है।
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
आधी नवरात्रि, आगे की तैयारी
चौथे दिन तक चैत्र की गर्मी बढ़ने लगती है। व्रत रखने वाले पानी, नारियल पानी, छाछ और मौसमी फल ज़्यादा लें, और ज़रूरत हो तो एक समय फलाहार की जगह दोनों समय हल्का फलाहार करें; इसका ब्योरा नवरात्रि व्रत में क्या खाएं में है। घरों में अब अष्टमी-नवमी की तैयारी की बातें शुरू हो जाती हैं: कितनी कन्याएँ बुलानी हैं, हलवा-पूरी-चना कब बनेगा। यह सब कन्या पूजन विधि में समझाया गया है। नवमी को दोपहर में राम जन्मोत्सव होता है, जिसकी विधि राम नवमी पूजा विधि में है।
आज क्या करें
- माँ को लाल फूल, खासकर गुड़हल, और सिंदूर चढ़ाएँ।
- भोग में मालपुआ चढ़ाने की परंपरा है; प्रसाद के बाद कुछ मालपुए किसी ज़रूरतमंद को दें।
- विनायक चतुर्थी मानने वाले गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएँ; उस दिन की जानकारी विनायक चतुर्थी पेज पर है।
- शाम को जय अम्बे गौरी आरती करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चैत्र नवरात्रि में कूष्मांडा पूजा कब है?
माँ कूष्मांडा को क्या भोग लगाएं?
क्या आज विनायक चतुर्थी भी है?
गर्मी में नवरात्रि व्रत कैसे संभालें?
कूष्मांडा नाम का अर्थ क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
