2026

वैशाख अमावस्या 2026

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मुख्य विवरण

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वैशाख अमावस्या

वैशाख अमावस्या क्या है

वैशाख अमावस्या वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की आख़िरी तिथि है, जो अप्रैल-मई की तेज़ गर्मी में आती है। स्कन्द पुराण के वैशाख माहात्म्य में इस पूरे महीने को स्नान, दान और जल-सेवा का महीना बताया गया है, और अमावस्या पर यह पुण्य कई गुना माना जाता है। इसी दिन पितरों के लिए तर्पण और दान भी किया जाता है।

किस तिथि को

उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह वैशाख कृष्ण अमावस्या है। अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में इसे चैत्र अमावस्या कहा जाता है, क्योंकि वहाँ चैत्र मास अमावस्या पर पूरा होता है। स्नान-दान के लिए वह दिन लिया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या हो।

इस दिन क्या करते हैं

  • सुबह गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान; घर पर हों तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान।
  • सूर्य को अर्घ्य और फिर पितरों के नाम से जल, तिल और कुश से तर्पण।
  • गर्मी के मौसम के अनुरूप दान: पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, सत्तू, छाता, पंखा, खरबूजा या ककड़ी। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में सत्तू और गुड़ का दान ख़ास तौर पर प्रचलित है।
  • राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या पक्षियों के लिए छत पर पानी रखना भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
  • शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है।

आगे-पीछे के पर्व

इस अमावस्या से कुछ दिन पहले वरूथिनी एकादशी आती है और ठीक तीन दिन बाद अक्षय तृतीया, जिसे बिना मुहूर्त देखे शुभ काम का दिन माना जाता है। अक्षय तृतीया की तैयारी के लिए अक्षय तृतीया पर क्या करें पढ़ें। अमावस्या पर किन बातों से बचें, यह अमावस्या के नियम में विस्तार से है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैशाख अमावस्या और चैत्र अमावस्या में क्या अंतर है?
दोनों एक ही दिन हैं। पूर्णिमांत पंचांग वाले उत्तर भारत में इसे वैशाख अमावस्या और अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में चैत्र अमावस्या कहा जाता है।
वैशाख अमावस्या पर क्या दान करें?
गर्मी का मौसम होने से जल से भरा घड़ा, सत्तू, गुड़, छाता, पंखा और मौसमी फल का दान अच्छा माना जाता है। अनाज और वस्त्र भी दे सकते हैं।
क्या इस दिन पितरों का तर्पण कर सकते हैं?
हाँ, हर अमावस्या की तरह इस दिन भी स्नान के बाद जल, काले तिल और कुश से पितरों का तर्पण किया जाता है।
वैशाख अमावस्या के बाद कौन सा बड़ा पर्व आता है?
तीन दिन बाद वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती आती है।
घर पर स्नान का पुण्य कैसे लें?
नदी तक न जा सकें तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और उसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें।

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