कार्तिक अमावस्या (दीपावली)
कार्तिक अमावस्या क्यों सबसे बड़ी अमावस्या है
कार्तिक अमावस्या साल की वह अमावस्या है जिस रात दीपावली मनाई जाती है। साल की सबसे अंधेरी रातों में से एक को घर-घर दीयों से रोशन करके माँ लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की पूजा की जाती है। लोक मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।
किस तिथि को और किस समय
पूर्णिमांत पंचांग में यह कार्तिक कृष्ण अमावस्या है; अमांत पंचांग (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) में इसे आश्विन अमावस्या कहते हैं। यह पृष्ठ सूर्योदय वाली अमावस्या दिखाता है, जो स्नान-दान और पितृ तर्पण के लिए ली जाती है। दीपावली की लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या होना ज़रूरी है, इसलिए दीपावली का दिन कभी-कभी इससे एक दिन पहले भी पड़ सकता है। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त लक्ष्मी पूजा पृष्ठ पर देखें।
इस दिन क्या करते हैं
- सुबह स्नान और पितरों के नाम से तर्पण; कई परिवार इस दिन पितरों के लिए दीपक भी जलाते हैं।
- दिन में घर की आख़िरी सफ़ाई, रंगोली और बंदनवार।
- प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा, खील-बताशे और मिठाई का भोग, और पूजा के बाद पूरे घर में दीये। विस्तृत क्रम दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि में है।
- व्यापारी इसी रात नए बही-खाते की पूजा करते हैं।
क्षेत्रीय परंपराएँ
बंगाल, असम और ओडिशा में इसी रात निशीथ काल में काली पूजा होती है। मिथिला और पूर्वांचल में सुबह-शाम सूप पीटकर दरिद्रता भगाने की रीत है, जिसे दलिद्दर भगाना कहते हैं। राजस्थान और गुजरात में अगले दिन से नया साल गिना जाता है।
पूजा के बाद ॐ जय लक्ष्मी माता आरती गाएं, और पूरे उत्सव का विवरण दीपावली पृष्ठ पर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीपावली किस अमावस्या को मनाई जाती है?
कार्तिक अमावस्या और दीपावली की तारीख़ अलग क्यों दिखती है?
लक्ष्मी पूजा किस समय करें?
क्या कार्तिक अमावस्या पर पितरों का तर्पण करते हैं?
बंगाल में इस रात कौन सी पूजा होती है?
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