अधिक मास अमावस्या
अधिक मास अमावस्या क्या है
अधिक मास अमावस्या वह अमावस्या है जो अधिक मास, यानी पुरुषोत्तम मास या मलमास में पड़ती है। अधिक मास लगभग हर ढाई-तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह अमावस्या भी उतनी ही दुर्लभ है। इस पूरे महीने के स्वामी भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) माने जाते हैं, और इसकी अमावस्या पर किया गया स्नान, दान, जप और पितृ तर्पण विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
अधिक मास कैसे बनता है
चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है। यह अंतर पूरा करने के लिए जब किसी चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं पड़ती, तो उस महीने को अधिक मास गिना जाता है और वह जिस महीने से पहले आता है, उसी का नाम लेता है, जैसे अधिक ज्येष्ठ या अधिक श्रावण। अधिक मास एक अमावस्या के बाद शुरू होकर अगली अमावस्या पर पूरा होता है, इसलिए यही अमावस्या अधिक मास का आख़िरी दिन है। अगले दिन से निज (शुद्ध) मास का शुक्ल पक्ष शुरू होता है। पूर्णिमांत पंचांग में अधिक मास निज मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष के बीच में रखा जाता है। पूरी गणना अधिक मास क्या है में समझाई गई है।
इस दिन क्या करते हैं
- सूर्योदय के समय की अमावस्या में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और पितरों का तर्पण।
- भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम या भागवत का पाठ, और दीपदान।
- अधिक मास में दान का बड़ा महत्व है; कई परिवार इस अमावस्या पर पूरे महीने के व्रत-दान का समापन करते हैं।
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए काम की शुरुआत इस पूरे महीने में टाली जाती है।
इसी महीने के व्रत
अधिक मास की दो एकादशियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परम एकादशी। सामान्य अमावस्या के नियम अमावस्या के नियम में और हर महीने की अमावस्या की सूची अमावस्या कैलेंडर में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अधिक मास अमावस्या कितने साल में आती है?
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
क्या अधिक मास अमावस्या पर शुभ काम कर सकते हैं?
अधिक मास अमावस्या पर क्या करें?
अधिक मास के बाद कौन सा महीना शुरू होता है?
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