2026

अधिक मास अमावस्या 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

अधिक मास अमावस्या

अधिक मास अमावस्या क्या है

अधिक मास अमावस्या वह अमावस्या है जो अधिक मास, यानी पुरुषोत्तम मास या मलमास में पड़ती है। अधिक मास लगभग हर ढाई-तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह अमावस्या भी उतनी ही दुर्लभ है। इस पूरे महीने के स्वामी भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) माने जाते हैं, और इसकी अमावस्या पर किया गया स्नान, दान, जप और पितृ तर्पण विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

अधिक मास कैसे बनता है

चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है। यह अंतर पूरा करने के लिए जब किसी चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं पड़ती, तो उस महीने को अधिक मास गिना जाता है और वह जिस महीने से पहले आता है, उसी का नाम लेता है, जैसे अधिक ज्येष्ठ या अधिक श्रावण। अधिक मास एक अमावस्या के बाद शुरू होकर अगली अमावस्या पर पूरा होता है, इसलिए यही अमावस्या अधिक मास का आख़िरी दिन है। अगले दिन से निज (शुद्ध) मास का शुक्ल पक्ष शुरू होता है। पूर्णिमांत पंचांग में अधिक मास निज मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष के बीच में रखा जाता है। पूरी गणना अधिक मास क्या है में समझाई गई है।

इस दिन क्या करते हैं

  • सूर्योदय के समय की अमावस्या में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और पितरों का तर्पण।
  • भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम या भागवत का पाठ, और दीपदान।
  • अधिक मास में दान का बड़ा महत्व है; कई परिवार इस अमावस्या पर पूरे महीने के व्रत-दान का समापन करते हैं।
  • विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए काम की शुरुआत इस पूरे महीने में टाली जाती है।

इसी महीने के व्रत

अधिक मास की दो एकादशियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परम एकादशी। सामान्य अमावस्या के नियम अमावस्या के नियम में और हर महीने की अमावस्या की सूची अमावस्या कैलेंडर में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधिक मास अमावस्या कितने साल में आती है?
अधिक मास लगभग हर 32-33 महीने में एक बार आता है, इसलिए उसकी अमावस्या भी उतने ही अंतर पर आती है।
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
पुराणों की कथा के अनुसार किसी देवता द्वारा न अपनाए जाने पर भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया, इसलिए यह विष्णु उपासना का महीना है।
क्या अधिक मास अमावस्या पर शुभ काम कर सकते हैं?
नहीं, पूरे अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते। पूजा, जप, दान और तीर्थ स्नान किए जा सकते हैं।
अधिक मास अमावस्या पर क्या करें?
स्नान, पितरों का तर्पण, भगवान विष्णु की पूजा, भागवत या गीता पाठ और अन्न-वस्त्र का दान इस दिन के मुख्य कर्म हैं।
अधिक मास के बाद कौन सा महीना शुरू होता है?
इस अमावस्या के अगले दिन से उसी नाम के निज (शुद्ध) मास का शुक्ल पक्ष शुरू होता है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...