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श्री मंगळगौरी अष्टोत्तरशतनामावळिः

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  1. ॐ गौर्यै नमः
  2. ॐ गणेशजनन्यै नमः
  3. ॐ गिरिराजतनूद्भवायै नमः
  4. ॐ गुहांबिकायै नमः
  5. ॐ जगन्मात्रे नमः
  6. ॐ गंगाधरकुटुंबिन्यै नमः
  7. ॐ वीरभद्रप्रसुवे नमः
  8. ॐ विश्वव्यापिन्यै नमः
  9. ॐ विश्वरूपिण्यै नमः
  10. ॐ अष्टमूर्त्यात्मिकायै नमः
  11. ॐ कष्टदारिद्य्रशमन्यै नमः
  12. ॐ शिवायै नमः
  13. ॐ शांभव्यै नमः
  14. ॐ शांकर्यै नमः
  15. ॐ बालायै नमः
  16. ॐ भवान्यै नमः
  17. ॐ भद्रदायिन्यै नमः
  18. ॐ मांगळ्यदायिन्यै नमः
  19. ॐ सर्वमंगळायै नमः
  20. ॐ मंजुभाषिण्यै नमः
  21. ॐ महेश्वर्यै नमः
  22. ॐ महामायायै नमः
  23. ॐ मंत्राराध्यायै नमः
  24. ॐ महाबलायै नमः
  25. ॐ हेमाद्रिजायै नमः
  26. ॐ हेमवत्यै नमः
  27. ॐ पार्वत्यै नमः
  28. ॐ पापनाशिन्यै नमः
  29. ॐ नारायणांशजायै नमः
  30. ॐ नित्यायै नमः
  31. ॐ निरीशायै नमः
  32. ॐ निर्मलायै नमः
  33. ॐ अंबिकायै नमः
  34. ॐ मृडान्यै नमः
  35. ॐ मुनिसंसेव्यायै नमः
  36. ॐ मानिन्यै नमः
  37. ॐ मेनकात्मजायै नमः
  38. ॐ कुमार्यै नमः
  39. ॐ कन्यकायै नमः
  40. ॐ दुर्गायै नमः
  41. ॐ कलिदोषनिषूदिन्यै नमः
  42. ॐ कात्यायिन्यै नमः
  43. ॐ कृपापूर्णायै नमः
  44. ॐ कळ्याण्यै नमः
  45. ॐ कमलार्चितायै नमः
  46. ॐ सत्यै नमः
  47. ॐ सर्वमय्यै नमः
  48. ॐ सौभाग्यदायै नमः
  49. ॐ सरस्वत्यै नमः
  50. ॐ अमलायै नमः
  51. ॐ अमरसंसेव्यायै नमः
  52. ॐ अन्नपूर्णायै नमः
  53. ॐ अमृतेश्वर्यै नमः
  54. ॐ अखिलागमसंस्तुत्यायै नमः
  55. ॐ सुखसच्चित्सुधारसायै नमः
  56. ॐ बाल्याराधितभूतेशायै नमः
  57. ॐ भानुकोटिसमद्युतये नमः
  58. ॐ हिरण्मय्यै नमः
  59. ॐ परायै नमः
  60. ॐ सूक्ष्मायै नमः
  61. ॐ शीतांशुकृतशेखरायै नमः
  62. ॐ हरिद्राकुंकुमाराध्यायै नमः
  63. ॐ सर्वकालसुमंगळ्यै नमः
  64. ॐ सर्वभोगप्रदायै नमः
  65. ॐ सामशिखायै नमः
  66. ॐ वेदांतलक्षणायै नमः
  67. ॐ कर्मब्रह्ममय्यै नमः
  68. ॐ कामकलनायै नमः
  69. ॐ कांक्षितार्थदायै नमः
  70. ॐ चंद्रार्कायितताटंकायै नमः
  71. ॐ चिदंबरशरीरिण्यै नमः
  72. ॐ श्रीचक्रवासिन्यै नमः
  73. ॐ देव्यै नमः
  74. ॐ कामेश्वरपत्न्यै नमः
  75. ॐ कमलायै नमः
  76. ॐ मारारातिप्रियार्धांग्यै नमः
  77. ॐ मार्कंडेयवरप्रदायै नमः
  78. ॐ पुत्रपौत्रवरप्रदायै नमः
  79. ॐ पुण्यायै नमः
  80. ॐ पुरुषार्थप्रदायिन्यै नमः
  81. ॐ सत्यधर्मरतायै नमः
  82. ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः
  83. ॐ शशांकरूपिण्यै नमः
  84. ॐ श्यामलायै नमः
  85. ॐ बगळायै नमः
  86. ॐ चंडायै नमः
  87. ॐ मातृकायै नमः
  88. ॐ भगमालिन्यै नमः
  89. ॐ शूलिन्यै नमः
  90. ॐ विरजायै नमः
  91. ॐ स्वाहायै नमः
  92. ॐ स्वधायै नमः
  93. ॐ प्रत्यंगिरांबिकायै नमः
  94. ॐ आर्यायै नमः
  95. ॐ दाक्षायिण्यै नमः
  96. ॐ दीक्षायै नमः
  97. ॐ सर्ववस्तूत्तमोत्तमायै नमः
  98. ॐ शिवाभिधानायै नमः
  99. ॐ श्रीविद्यायै नमः
  100. ॐ प्रणवार्थस्वरूपिण्यै नमः
  101. ॐ ह्रींकार्यै नमः
  102. ॐ नादरूपिण्यै नमः
  103. ॐ त्रिपुरायै नमः
  104. ॐ त्रिगुणायै नमः
  105. ॐ ईश्वर्यै नमः
  106. ॐ सुंदर्यै नमः
  107. ॐ स्वर्णगौर्यै नमः
  108. ॐ षोडशाक्षरदेवतायै नमः

|| इति श्री मंगळगौरी अष्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||

अर्थ

श्री मंगलगौरी अष्टोत्तरशतनामावलिः, आदिशक्ति माँ पार्वती के मंगलकारी स्वरूप, श्री मंगलगौरी को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावलि देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों, रूपों और दिव्य महिमा को प्रकट करती है। विशेष रूप से श्रावण मास में मनाए जाने वाले मंगलगौरी व्रत के दौरान इस नामावलि का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। मंगलगौरी, भगवान शिव की शक्ति, गणेश की जननी और संपूर्ण ब्रह्मांड की माता हैं। यह नामावलि भक्तों को शांति, समृद्धि, सौभाग्य और मंगल प्रदान करने वाली देवी की कृपा प्राप्त करने में सहायक है।

इस नामावलि का प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट स्वरूप, लीला और गुण का वर्णन करता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ गौर्यै नमः' का अर्थ है गौरी देवी को नमन, 'ॐ गणेशजनन्यै नमः' का अर्थ है गणेश की माता को नमन, और 'ॐ गिरिराजतनूद्भवायै नमः' का अर्थ है पर्वतराज की पुत्री को नमन। ये नाम देवी के मूल स्वरूप, मातृत्व और वंश को दर्शाते हैं। 'ॐ जगन्मात्रे नमः', 'ॐ विश्वव्यापिन्यै नमः', 'ॐ विश्वरूपिण्यै नमः' जैसे नाम यह उद्घोषित करते हैं कि वह संपूर्ण विश्व की माता, सर्वव्यापी और स्वयं विश्व का स्वरूप हैं। 'ॐ कष्टदारिद्र्यशमन्यै नमः' का अर्थ है कष्ट और दरिद्रता को दूर करने वाली, जो देवी की भक्तों के दुखों को हरने की शक्ति को उजागर करता है।

'ॐ शिवायै नमः', 'ॐ शांतार्यै नमः', 'ॐ शांभव्यै नमः', 'ॐ शांकर्यै नमः' जैसे नाम देवी के शांत स्वभाव, शुभकारी रूप और भगवान शिव के साथ उनके अभिन्न संबंध को दर्शाते हैं। 'ॐ मांगल्यदायिन्यै नमः' और 'ॐ सर्वमंगलायै नमः' नाम यह स्पष्ट करते हैं कि मंगलगौरी विवाहित महिलाओं को सौभाग्य प्रदान करने वाली और सभी शुभता देने वाली हैं। 'ॐ महेश्वर्यै नमः', 'ॐ महामायायै नमः', 'ॐ मंत्राराध्यायै नमः' जैसे नाम उनकी परम शक्ति, माया स्वरूप और मंत्रों द्वारा पूजनीय दिव्यत्व को बताते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक नाम देवी के अनंत गुणों की स्तुति करता है और भक्तों के मन में गहरी भक्ति जगाता है।

इस अष्टोत्तरशतनामावलि का निरंतर पाठ करने से देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह केवल नामों का संग्रह नहीं, बल्कि देवी की दिव्य शक्ति से जुड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम है। प्रत्येक नाम एक मंत्र की तरह कार्य करता है, जो भक्तों के मन को शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इन पवित्र नामों का जाप करने से मानसिक शांति, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। विशेष रूप से, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार के सुख-समृद्धि के लिए इस नामावलि का पाठ करती हैं। यह देवी के आशीर्वाद से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और सुखी जीवन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

लाभ (Benefits):

  • मांगल्य सौभाग्य में वृद्धि: विवाहित महिलाएं इस नामावलि का पाठ करके अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और परिवार में सौभाग्य में वृद्धि प्राप्त करती हैं।
  • संतान प्राप्ति: निःसंतान दंपत्ति भक्तिभाव से इस नामावलि का पाठ करें तो मंगलगौरी की कृपा से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
  • समृद्धि और ऐश्वर्य: देवी सभी प्रकार की संपत्ति की अधिष्ठात्री हैं, और इस नामावलि के पाठ से घर में धन-संपत्ति और समृद्धि आती है, दरिद्रता दूर होती है।
  • बाधाओं का निवारण: जीवन में आने वाली कठिनाइयों, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है, तथा सभी कार्यों में शुभता आती है।
  • मानसिक शांति और संतोष: देवी के पवित्र नामों के स्मरण से मन को शांति और संतोष मिलता है, तथा मानसिक तनाव कम होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री मंगळगौरी अष्टोत्तरशतनामावळिः क्या है?
यह आदिशक्ति माँ पार्वती के मंगलकारी स्वरूप, श्री मंगलगौरी को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावलि देवी के विभिन्न गुणों और महिमा को प्रकट करती है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
मंगलगौरी अष्टोत्तर का पाठ विशेष रूप से श्रावण मास में आने वाले मंगलवार को मनाए जाने वाले मंगलगौरी व्रत के दौरान किया जाता है। इसे प्रतिदिन शुद्ध मन से, देवी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर भक्तिपूर्वक पाठ कर सकते हैं।
श्री मंगळगौरी अष्टोत्तरशतनामावळिः पाठ करने के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस नामावलि का पाठ करने से पति की लंबी आयु, उत्तम संतान की प्राप्ति, परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण जैसे लाभ प्राप्त होते हैं।
इस नामावलि का पाठ किसे करना चाहिए?
विवाहित महिलाएं अपने पति के स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए, अविवाहित युवतियां उत्तम वर की प्राप्ति के लिए, और निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए इस नामावलि का पाठ कर सकते हैं।
मंगलगौरी अष्टोत्तर का पाठ कितनी बार करना उचित है?
मंगलगौरी व्रत के दौरान कम से कम एक बार या तीन बार पाठ करना शुभ होता है। दैनिक पूजा में कम से कम एक बार संपूर्ण नामावलि का पाठ करना देवी की विशेष कृपा प्राप्त करने में सहायक है।
इस नामावलि का मूल या पृष्ठभूमि क्या है?
मंगलगौरी पूजा और यह अष्टोत्तर शतनामावलि स्कंद पुराण जैसे प्राचीन धर्मग्रंथों में उल्लिखित हैं। यह सनातन हिंदू धर्म की शक्ति आराधना का एक भाग है, जो मंगलगौरी व्रत के साथ प्रचलन में आया है।

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