का

श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावळि

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तर108 नाम
0 व्यूज़
  1. ॐ कल्याण्यै नमः
  2. ॐ त्रिपुरायै नमः
  3. ॐ बालायै नमः
  4. ॐ मायायै नमः
  5. ॐ त्रिपुरसुंदर्यै नमः
  6. ॐ सुंदर्यै नमः
  7. ॐ सौभाग्यवत्यै नमः
  8. ॐ क्लींकार्यै नमः
  9. ॐ सर्वमंगळायैनमः
  10. ॐ ह्रींकार्यै नमः
  11. ॐ स्कंदजनन्यै नमः
  12. ॐ परायै नमः
  13. ॐ पंचदशाक्ष्ये नमः
  14. ॐ त्रिलोक्यमोहनाधीशायै नमः
  15. ॐ सर्वाशापूरवल्लभायै नमः
  16. ॐ सर्वसंक्षोभणाधीशायै नमः
  17. ॐ सर्वसौभाग्य वल्लभायै नमः
  18. ॐ सर्वार्थसाधकाधीशायै नमः
  19. ॐ सर्वारक्षकाराधिपायै नमः
  20. ॐ सर्वरोगहराधीशायै नमः
  21. ॐ सर्वसिद्धि प्रदाधिपायै नमः
  22. ॐ सर्वानंदमयाधीशायै नमः
  23. ॐ योगिनीचक्रनायिकायै नमः
  24. ॐ भक्तानुरक्तायै नमः
  25. ॐ रक्तांगै नमः
  26. ॐ शंकरार्थशरीरण्यै नमः
  27. ॐ पुष्पबाणेक्षुकोदंड नमः
  28. ॐ पाशांकुशकरायै नमः
  29. ॐ उज्ज्वलायै नमः
  30. ॐ सच्चिदानंदलह्यै नमः
  31. ॐ श्रीविद्यायै नमः
  32. ॐ परमेश्वर्यै नमः
  33. ॐ अनंगकुसुमोद्यानायै नमः
  34. ॐ चक्रेश्यै नमः
  35. ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
  36. ॐ गुप्तायै नमः
  37. ॐ गुप्ततरायै नमः
  38. ॐ नित्यायै नमः
  39. ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः
  40. ॐ मदद्रवायै नमः
  41. ॐ मोहिन्यै नमः
  42. ॐ परमानंददायै नमः
  43. ॐ कामेश्यै नमः
  44. ॐ तरुणीकलायै नमः
  45. ॐ कलावत्यै नमः
  46. ॐ भगवत्यै नमः
  47. ॐ पद्मरागकिरीटिकायै नमः
  48. ॐ रक्तवस्त्रयै नमः
  49. ॐ रक्तभूषायै नमः
  50. ॐ रक्तगंधानुलेपनायै नमः
  51. ॐ सौगंधिककलसद्वेण्यै नमः
  52. ॐ मंत्रिण्यै नमः
  53. ॐ तंत्ररूपिण्यै नमः
  54. ॐ तत्वमध्यै नमः
  55. ॐ सिद्धांतपुरवासिन्यै नमः
  56. ॐ श्रीमत्यै नमः
  57. ॐ चिन्ममय्यै नमः
  58. ॐ देव्यै नमः
  59. ॐ कौळिन्यै नमः
  60. ॐ परदेवतायै नमः
  61. ॐ कैवल्यरेखायै नमः
  62. ॐ वशिन्यै नमः
  63. ॐ सर्यैश्वर्यै नमः
  64. ॐ सर्वमातृकायै नमः
  65. ॐ विष्णुस्वस्ते नमः
  66. ॐ वेदमथ्यै नमः
  67. ॐ सर्वसंतत् प्रदायन्न्यै नमः
  68. ॐ किंकरीभूत गीर्वाण्यै नमः
  69. ॐ सुधावापी विनोदिन्यै नमः
  70. ॐ मणिपुरसमासीनायै नमः
  71. ॐ अनाहताब्द निवासिन्यै नमः
  72. ॐ विशुद्धचक्रनिलयायै नमः
  73. ॐ आज्ञापद्मनिवासिन्यै नमः
  74. ॐ अष्टत्रिशत् कलामूल्यै नमः
  75. ॐ सुषुम्ना द्वारमध्यगायै नमः
  76. ॐ योगीश्वरमनोध्येयायै नमः
  77. ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
  78. ॐ चतुर्भुजायै नमः
  79. ॐ चंद्रचूडायै नमः
  80. ॐ पुराणागमरूपिण्यै नमः
  81. ॐ ओंकार्यै नमः
  82. ॐ विमलायै नमः
  83. ॐ विद्यायै नमः
  84. ॐ पंचब्रह्मरूपिण्यै नमः
  85. ॐ भूतेश्वर्यै नमः
  86. ॐ भूतमद्यै नमः
  87. ॐ पंचाशत् पीठरूपिण्यै नमः
  88. ॐ षोडान्यासमहारूपायै नमः
  89. ॐ कामाक्षे नमः
  90. ॐ दशमातृकायै नमः
  91. ॐ आधारशक्तेयै नमः
  92. ॐ अरुणायै नमः
  93. ॐ लक्ष्मै नमः
  94. ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः
  95. ॐ रहःपूजासमालोलायै नमः
  96. ॐ त्रिकोण मध्य निलयायै नमः
  97. ॐ बिंदुमंडल निलयालै नमः
  98. ॐ वसुकोणपुरावासायै नमः
  99. ॐ दशार्द्वयवासिन्यै नमः
  100. ॐ चतुर्दशारचक्रस्तायै नमः
  101. ॐ वसुपद्मनिवासिन्यै नमः
  102. ॐ स्वराब्जपत्रनिवासिन्यै नमः
  103. ॐ वृत्तत्रयनिवासिन्यै नमः
  104. ॐ चतुरस्त्र स्वरूपास्यायै नमः
  105. ॐ नवचक्र स्वरूपण्यै नमः
  106. ॐ महानित्यायै नमः
  107. ॐ विजयायै नमः
  108. ॐ कात्यायण्यै नमः

 || श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि आदिशक्ति दुर्गा देवी के छठे स्वरूप, श्री कात्यायनी देवी को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावलि देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों का वर्णन करती है। नवरात्रि के छठे दिन श्री कात्यायनी देवी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इन नामों का पाठ करने से भक्त देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि पाते हैं।

इस नामावलि का प्रत्येक नाम देवी की अद्वितीय शक्ति और महिमा को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ कल्याण्यै नमः' का अर्थ है शुभ प्रदान करने वाली, जबकि 'ॐ त्रिपुरायै नमः' और 'ॐ त्रिपुरसुंदर्यै नमः' नाम तीन लोकों की अधिपति और अत्यंत सुंदर रूप वाली देवी को दर्शाते हैं। 'ॐ मायायै नमः' यह बताता है कि देवी अपनी माया शक्ति से सृष्टि को नियंत्रित करती हैं। 'ॐ क्लींकार्यायै नमः' और 'ॐ ह्रींकार्यायै नमः' नाम बीजाक्षर मंत्रों से देवी के संबंध को सूचित करते हैं, जो आकर्षण और सर्वोच्च शक्ति के प्रतीक हैं।

इस अष्टोत्तर में 'ॐ स्कंदजनन्यै नमः' नाम यह दर्शाता है कि देवी कार्तिकेय की माता हैं, जो मातृत्व के श्रेष्ठ रूप को उजागर करता है। 'ॐ पंचदशाक्ष्यै नमः' श्री विद्या के पंचदशाक्षरी मंत्र से देवी के संबंध का वर्णन करता है, जो उन्हें परम ज्ञान की अधिष्ठात्री के रूप में प्रस्तुत करता है। 'ॐ सर्वाशापूरवल्लभायै नमः', 'ॐ सर्वसौभाग्य वल्लभायै नमः', 'ॐ सर्वार्थसाधकाधीशायै नमः', 'ॐ सर्वरक्षकराधिपायै नमः', 'ॐ सर्वरोगहराधीशायै नमः', 'ॐ सर्वसिद्धि प्रदाधिपायै नमः' और 'ॐ सर्वानंदमयाधीशायै नमः' नाम भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने, सौभाग्य, सफलता, रक्षा, स्वास्थ्य, सिद्धियाँ प्रदान करने और परम आनंद प्रदान करने की उनकी क्षमता का वर्णन करते हैं, जो श्री चक्र के विभिन्न आवरणों की शक्तियों को दर्शाते हैं।

'ॐ योगिनीचक्रनायिकायै नमः' नाम यह इंगित करता है कि देवी योगिनी चक्रों की नायिका हैं। 'ॐ शंकरार्धशरीरण्यै नमः' शिव के आधे शरीर वाली अर्धनारीश्वरी के रूप को दर्शाता है, जो पुरुष और प्रकृति की एकता का प्रतिनिधित्व करता है। 'ॐ पुष्पबाणेक्षुकोदण्ड नमः' और 'ॐ पाशांकुशकराये नमः' नाम देवी के हाथों में धारण किए गए आयुधों (पुष्प बाण, गन्ने का धनुष, पाश और अंकुश) का वर्णन करते हैं, जो इच्छा, मन, आकर्षण और नियंत्रण के प्रतीक हैं। 'ॐ सच्चिदानंदलह्यै नमः' और 'ॐ श्रीविद्यायै नमः' नाम देवी के सच्चिदानंद स्वरूप और उन्हें श्री विद्या का मूल बताते हैं। इस नामावलि का पाठ करने से भक्तों को देवी का पूर्ण अनुग्रह प्राप्त होता है।

लाभ (Benefits):

  • विवाह बाधा निवारण: विवाह से संबंधित बाधाओं को दूर कर, उत्तम जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए कात्यायनी देवी का आशीर्वाद मिलता है।
  • शत्रु संहार और सुरक्षा: कात्यायनी देवी दुष्ट शक्तियों और शत्रुओं से रक्षा करती हैं, तथा भक्तों को साहस और शक्ति प्रदान करती हैं।
  • स्वास्थ्य और धन वृद्धि: देवी की आराधना उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है, सभी प्रकार के रोगों को दूर करती है और जीवन में धन तथा समृद्धि लाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: इस नामावलि का पाठ करने से मन को शांति, एकाग्रता मिलती है और आध्यात्मिक मार्ग पर प्रगति करने में सहायता मिलती है।
  • सभी मनोकामनाओं की सिद्धि: भक्तों की सभी नेक इच्छाओं को पूर्ण करने में कात्यायनी देवी सहायता करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि दुर्गा देवी के छठे स्वरूप, श्री कात्यायनी देवी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। ये नाम देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों का वर्णन करते हैं।
श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ प्रतिदिन, विशेषकर मंगलवार और शुक्रवार को, या नवरात्रि के छठे दिन किया जा सकता है। स्नान करके शुद्ध होकर, देवी की प्रतिमा के सामने बैठकर भक्तिपूर्वक पाठ करना चाहिए।
इस नामावलि का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावलि का पाठ करने से विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं, शत्रुओं से रक्षा मिलती है, उत्तम स्वास्थ्य और धन की वृद्धि होती है, तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, विशेषकर विवाह के इच्छुक, जीवन में सुरक्षा और समृद्धि चाहने वाले, और आध्यात्मिक प्रगति की इच्छा रखने वाले इस नामावलि का पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, दिन में कम से कम एक बार या 11, 21, 51 या 108 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।
श्री कात्यायनी अष्टोत्तर शतनामावलि का मूल क्या है?
यह नामावलि पुराणों और तंत्र ग्रंथों से ली गई है। कात्यायनी देवी दुर्गा देवी का एक महत्वपूर्ण स्वरूप हैं, जिनकी महिमा का वर्णन विभिन्न धर्मग्रंथों में किया गया है।

नवदुर्गा की कथाएँ

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...