यमुना छठ (यमुना जयंती)
यमुना छठ, जिसे यमुना जयंती भी कहते हैं, यमुना मैया के धरती पर प्रकट होने का दिन माना जाता है। यह चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है और ब्रज, यानी मथुरा-वृंदावन, में इसकी सबसे ज़्यादा धूम रहती है।
यमुना जी कौन हैं
पुराणों के अनुसार यमुना सूर्यदेव और संज्ञा की पुत्री हैं, और यमराज उनके सगे भाई। कलिंद पर्वत से निकलने के कारण उन्हें कालिंदी भी कहते हैं। ब्रज की परंपरा में वे श्रीकृष्ण की प्रिया हैं; भागवत में कालिंदी कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक हैं। भाई-बहन के इसी रिश्ते से भाई दूज की कथा जुड़ी है, जब यम अपनी बहन के घर भोजन करने गए थे।
किस तिथि को
चैत्र शुक्ल षष्ठी, जो सूर्योदय के समय हो। इसी दिन नवरात्रि की कात्यायनी पूजा भी होती है, और ब्रज की गोपियों का कात्यायनी व्रत भी यमुना किनारे ही हुआ था। ध्यान रखें कि नाम में छठ होने पर भी यह बिहार की सूर्य उपासना वाली छठ पूजा से अलग पर्व है, भले ही चैती छठ का शाम का अर्घ्य भी इसी षष्ठी को पड़ता है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह यमुना स्नान; मथुरा के विश्राम घाट और वृंदावन के केशी घाट पर भारी भीड़ रहती है।
- यमुना जी को दूध, फूल, मिठाई और श्रृंगार चढ़ाया जाता है।
- चुनरी मनोरथ: नावों की मदद से बहुत लंबी चुनरी नदी के आर-पार ओढ़ाई जाती है।
- शाम को दीपदान और विश्राम घाट पर यमुना आरती होती है।
- पुष्टिमार्ग के मंदिरों में वल्लभाचार्य रचित यमुनाष्टक का पाठ और विशेष श्रृंगार होता है।
जो ब्रज नहीं जा सकते, वे घर पर नहाते समय यमुना जी का स्मरण करते हैं और शाम को ठाकुर जी के सामने आरती कुंजबिहारी की गाते हैं। यमुना का उद्गम उत्तराखंड का यमुनोत्री है, जिसकी यात्रा चार धाम यात्रा में शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यमुना छठ कब मनाई जाती है?
यमुना छठ क्यों मनाते हैं?
क्या यमुना छठ और छठ पूजा एक हैं?
यमुना छठ पर क्या करें?
यमुना जी का यमराज से क्या संबंध है?
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