2026

चैत्र नवरात्रि: कात्यायनी पूजा 2026

मंगलवार, मार्च 24, 2026

मुख्य विवरण

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चैत्र नवरात्रि: कात्यायनी पूजा

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने के कारण देवी का यह नाम पड़ा, और इसी रूप में उन्होंने महिषासुर का वध किया। अविवाहित लड़कियाँ अच्छे वर की कामना से इस दिन विशेष रूप से माँ की पूजा करती हैं।

कथा और स्वरूप

कथा है कि ऋषि कात्यायन ने देवी को पुत्री रूप में पाने के लिए तप किया था। जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ा, तो देवताओं के तेज से जो देवी प्रकट हुईं, उन्होंने पहले कात्यायन ऋषि की पूजा स्वीकार की, इसलिए वे कात्यायनी कहलाईं। देवी की चार भुजाएँ हैं, हाथों में तलवार और कमल हैं, और वाहन सिंह है। भागवत पुराण में ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना किनारे कात्यायनी व्रत किया था। यही कारण है कि ब्रज में इस रूप का खास महत्व है।

किस तिथि को

चैत्र शुक्ल षष्ठी, जो सूर्योदय के समय हो। इसी दिन ब्रज में यमुना छठ भी मनाई जाती है, और बिहार में चैती छठ का संध्या अर्घ्य भी इसी षष्ठी को पड़ता है।

पूजा, ध्यान मंत्र और भोग

माँ को पीले या लाल फूल, हल्दी की गाँठ और शहद चढ़ाएँ। ध्यान श्लोक है:

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

इस दिन शहद का भोग लगाने की परंपरा है। विवाह की कामना वाली कन्याएँ यह मंत्र जपती हैं: "कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥" शाम को दुर्गा जी की आरती करें। बाकी रूपों का क्रम नवदुर्गा के नौ रूप में और पूरा कैलेंडर नवरात्रि पृष्ठ पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ कात्यायनी की पूजा किस दिन होती है?
नवरात्रि के छठे दिन, चैत्र शुक्ल षष्ठी को, जब यह तिथि सूर्योदय के समय हो।
माँ कात्यायनी को कौन सा भोग प्रिय है?
छठे दिन माँ को शहद का भोग लगाया जाता है। कुछ परिवार शहद से बनी मिठाई या पान भी चढ़ाते हैं।
शीघ्र विवाह के लिए कात्यायनी मंत्र कौन सा है?
'कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥' यह वही मंत्र है जिसे भागवत के अनुसार गोपियों ने जपा था।
देवी का नाम कात्यायनी क्यों पड़ा?
वे महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुईं और सबसे पहले उन्हीं की पूजा स्वीकार की, इसलिए कात्यायनी कहलाईं।
क्या इसी दिन यमुना छठ भी होती है?
हाँ, चैत्र शुक्ल षष्ठी को ब्रज में यमुना जी का प्राकट्य उत्सव यानी यमुना छठ मनाई जाती है।

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