2026

सीता नवमी 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

सीता नवमी

सीता नवमी माता सीता के प्राकट्य का दिन है, जिसे जानकी नवमी भी कहते हैं। यह वैशाख शुक्ल नवमी को मनाई जाती है, ठीक एक महीने पहले चैत्र शुक्ल नवमी को राम नवमी आती है। सुहागिन स्त्रियाँ इस दिन व्रत रखकर सीता-राम की पूजा करती हैं।

क्या है और क्यों मनाते हैं

वाल्मीकि रामायण के अनुसार मिथिला में अकाल पड़ने पर राजा जनक ने यज्ञ के लिए स्वयं हल चलाया। हल की नोक (जिसे सीता कहते हैं) से धरती में एक कलश टकराया और उसमें से एक कन्या मिली। इसी से उनका नाम सीता पड़ा, और जनक की पुत्री होने से वे जानकी, मिथिला की होने से मैथिली कहलाईं। धरती से प्रकट होने के कारण उन्हें भूमिजा भी कहा जाता है। सीता जी को धैर्य, त्याग और पवित्रता का आदर्श माना जाता है, इसलिए महिलाएँ परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं।

किस तिथि को

वैशाख शुक्ल नवमी, जिस दिन सूर्योदय पर नवमी हो। परंपरा में सीता जी का प्राकट्य पुष्य नक्षत्र और मध्याह्न में माना गया है, इसलिए मुख्य पूजा दोपहर में की जाती है। ध्यान रहे, कुछ क्षेत्रों में, खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में, जानकी जयंती फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को भी मनाई जाती है; उत्तर भारत में वैशाख शुक्ल नवमी ही प्रचलित है।

कैसे मनाते हैं

  • सुबह व्रत का संकल्प, दोपहर में सीता-राम, राजा जनक और माता सुनयना की पूजा।
  • माता सीता को सुहाग की वस्तुएँ, लाल चुनरी, पीले फूल और खीर-फल का भोग।
  • रामचरितमानस के बालकांड से सीता स्वयंवर का पाठ और श्री राम जी की आरती।
  • शाम को फलाहार या अगले दिन पारण।

क्षेत्रीय परंपराएँ

बिहार के सीतामढ़ी में पुनौरा धाम और नेपाल के जनकपुर में इस दिन विशेष उत्सव होता है; मिथिला क्षेत्र में यह घर की बेटी के जन्मदिन जैसा मनता है। सीता-राम के विवाह का उत्सव विवाह पंचमी पर होता है, जिसके बारे में विवाह पंचमी लेख में पढ़ें। राम जी के जन्मदिन के लिए राम नवमी पृष्ठ देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीता नवमी कब होती है?
सीता नवमी वैशाख शुक्ल नवमी को होती है, जो राम नवमी के ठीक एक महीने बाद आती है।
सीता नवमी पर पूजा किस समय करें?
परंपरा के अनुसार माता सीता का प्राकट्य मध्याह्न में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा दोपहर में की जाती है।
सीता जी का जन्म कहाँ हुआ था?
मान्यता है कि मिथिला में राजा जनक के हल चलाते समय वे धरती से प्रकट हुईं। बिहार का सीतामढ़ी (पुनौरा धाम) इसी से जुड़ा माना जाता है।
सीता नवमी का व्रत कौन रखता है?
मुख्य रूप से सुहागिन स्त्रियाँ परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं।
क्या जानकी जयंती और सीता नवमी एक ही हैं?
उत्तर भारत में दोनों नाम वैशाख शुक्ल नवमी के लिए हैं; महाराष्ट्र-गुजरात में जानकी जयंती फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को भी मनाई जाती है।

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