विवाह पंचमी मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी तिथि को जनकपुर में भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। 2026 में विवाह पंचमी 14 दिसंबर को और 2027 में 3 दिसंबर को है (नई दिल्ली)। इस दिन घरों और मंदिरों में राम-सीता का प्रतीकात्मक विवाह, रामचरितमानस के बालकांड का पाठ और मंगल गीत होते हैं।
कब और क्यों
वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी के रामचरितमानस दोनों में राम-सीता विवाह का प्रसंग है। विश्वामित्र मुनि के साथ राम और लक्ष्मण जनकपुर पहुँचे, जहाँ राजा जनक ने सीता के स्वयंवर के लिए शर्त रखी थी कि जो शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। बड़े-बड़े राजा धनुष हिला तक नहीं पाए, और राम जी ने उसे उठाया तो वह टूट गया। फिर अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर आए और अगहन शुक्ल पंचमी को विवाह हुआ। इसी विवाह में भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह भी हुए।
परंपरा के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना भी विवाह पंचमी के दिन पूरी की थी, इसलिए मानस प्रेमियों के लिए यह दिन दोहरा उत्सव है। इस साल की तिथि और मुहूर्त विवाह पंचमी पृष्ठ पर देखें।
जनकपुर और अयोध्या का उत्सव
जनकपुर (नेपाल)
जनकपुरधाम, जो बिहार की सीमा से लगे नेपाल के मधेश प्रदेश में है, सीता जी का मायका माना जाता है। यहाँ के जानकी मंदिर में विवाह पंचमी सबसे बड़ा उत्सव है। कई दिनों तक मेला लगता है, धनुष यज्ञ की झाँकी होती है, राम जी की बारात नगर में घूमती है और रात में विवाह मंडप में वैदिक रीति से राम-सीता का विवाह कराया जाता है। मिथिला की महिलाएँ इस मौके पर वही गीत गाती हैं जो अपनी बेटियों की शादी में गाती हैं, जैसे परिछन, कोहबर और गाली गीत। कुछ वर्षों में अयोध्या से जनकपुर तक बारात यात्रा भी निकाली जाती है।
अयोध्या
अयोध्या में यह दिन "राम विवाहोत्सव" कहलाता है। कनक भवन, जो परंपरा से सीता जी को मुँह-दिखाई में मिला महल माना जाता है, विवाह पंचमी पर खूब सजता है। मठ-मंदिरों से राम बारात निकलती है, सरयू किनारे भजन-कीर्तन होते हैं और कई आश्रमों में पूरे हफ़्ते रामकथा चलती है। अयोध्या यात्रा की योजना बना रहे हैं तो अयोध्या राम मंदिर दर्शन गाइड देखें, और दर्शन का समय व नियम मंदिर ट्रस्ट से ज़रूर पुष्टि करें क्योंकि ये बदलते रहते हैं।
बिहार के सीतामढ़ी (पुनौरा धाम, जिसे सीता जी का जन्मस्थान माना जाता है) और दरभंगा-मधुबनी के गाँवों में भी इस दिन राम-सीता विवाह की झाँकियाँ होती हैं।
घर पर राम-सीता विवाह पूजा
घर पर यह पूजा शादी जैसे उत्साह से की जाती है, बस छोटे पैमाने पर। बहुत-सी कुँवारी लड़कियाँ अच्छे जीवनसाथी के लिए और विवाहित जोड़े दांपत्य में प्रेम के लिए यह पूजा करते हैं।
सामग्री
- राम-सीता की मूर्ति या चित्र (राम दरबार का चित्र भी चलेगा), लकड़ी की चौकी, पीला और लाल कपड़ा
- राम जी के लिए पीला वस्त्र, सीता जी के लिए लाल चुनरी और सुहाग की छोटी सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, आलता)
- दो छोटी फूल मालाएँ, कलावा, हल्दी, रोली, अक्षत, तुलसी दल
- कलश, आम के पत्ते, नारियल, घी का दीपक, धूप
- भोग: खीर, पूरी, फल, पंचमेवा। मिथिला में दही-चूड़ा और मिठाई भी चढ़ाते हैं।
कुछ न मिले तो चिंता न करें: चुनरी की जगह लाल कपड़े का टुकड़ा, माला की जगह खुले फूल और खीर की जगह मिश्री का भोग भी पर्याप्त है।
विधि
- सुबह स्नान करके व्रत या पूजा का संकल्प लें। कई लोग इस दिन दोपहर तक उपवास रखते हैं।
- चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर राम जी को दाईं ओर और सीता जी को बाईं ओर बिठाएं। पास में कलश स्थापित करें।
- सबसे पहले गणेश जी और कलश की पूजा करें।
- राम जी को पीला वस्त्र और सीता जी को लाल चुनरी चढ़ाएं। सीता जी को सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- दोनों को एक-दूसरे के नाम से माला पहनाएं, जैसे जयमाला होती है।
- कलावे से दोनों के वस्त्रों का गठबंधन करें।
- हल्दी-रोली का तिलक लगाएं, फूल और तुलसी दल चढ़ाएं। सीता जी की माँग में सिंदूर का स्पर्श कराएं।
- घर की महिलाएँ मंगल गीत या विवाह गीत गाएं।
- भोग लगाकर श्री राम जी की आरती करें और सबको प्रसाद बाँटें।
रामचरितमानस बालकांड का पाठ
विवाह पंचमी पर सबसे प्रचलित पाठ रामचरितमानस के बालकांड का वह हिस्सा है जो पुष्पवाटिका प्रसंग से शुरू होकर धनुष यज्ञ, परशुराम संवाद, बारात आगमन, विवाह और विदाई तक जाता है। पूरा बालकांड एक दिन में पढ़ना भी कई परिवारों की परंपरा है।
- समय कम हो तो केवल पुष्पवाटिका (जहाँ राम-सीता पहली बार एक-दूसरे को देखते हैं) और विवाह प्रसंग पढ़ें।
- मानस पाठ से पहले हनुमान जी का स्मरण करें, क्योंकि माना जाता है कि जहाँ रामकथा होती है वहाँ वे उपस्थित रहते हैं।
- पाठ के बाद तुलसीदास जी की स्तुति श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन गाई जाती है, जो विनय पत्रिका की रचना है और विवाह पंचमी के कीर्तन में बहुत लोकप्रिय है।
मिथिला में इस दिन विवाह क्यों टालते हैं
सुनने में अजीब लगता है कि जिस दिन राम-सीता का विवाह हुआ, उसी दिन मिथिला और नेपाल के कई हिस्सों में बेटियों की शादी नहीं की जाती। इसका कारण भावनात्मक है। सीता जी मिथिला की बेटी हैं, और उनका वैवाहिक जीवन कठिनाइयों से भरा रहा: चौदह वर्ष का वनवास, रावण द्वारा हरण, अग्नि परीक्षा और फिर गर्भावस्था में वन में छोड़ा जाना। मिथिला के लोग नहीं चाहते कि उनकी बेटियों को वैसे कष्ट झेलने पड़ें, इसलिए इस तिथि को विवाह के लिए चुना नहीं जाता।
उत्तर प्रदेश और बाकी उत्तर भारत में ऐसी कोई रोक आम तौर पर नहीं मानी जाती, और कई पंचांगों में इस दिन विवाह मुहूर्त भी होते हैं। यह क्षेत्रीय मान्यता है, शास्त्रीय निषेध नहीं। विवाह की तिथि चुनते समय अपने परिवार की रीति और पंडित जी की सलाह मानें।
विवाह पंचमी अगहन मास में आती है, जिसके बाकी त्योहार और नियम मार्गशीर्ष मास में पढ़ें। इसके कुछ ही दिन बाद धनु संक्रांति से खरमास शुरू होता है, इसलिए यह शादियों के मौसम का आख़िरी बड़ा पड़ाव भी है।

