अयोध्या का राम जन्मभूमि मंदिर भगवान राम के जन्मस्थान पर बना है, जहाँ गर्भगृह में पाँच वर्ष के बालक रूप में रामलला विराजमान हैं। यहाँ दर्शन के लिए देशभर से परिवार आते हैं, और ज़्यादातर लोग एक ही यात्रा में हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू तट भी जोड़ लेते हैं। यह गाइड बताती है कि दर्शन किस क्रम में करें, कब जाएँ और क्या तैयारी रखें।
राम जन्मभूमि का महत्व
अयोध्या सप्तपुरियों में पहली मानी गई है। एक प्रचलित श्लोक है:
अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः॥
यानी अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन और द्वारका, ये सात नगरियाँ मोक्ष देने वाली हैं। वाल्मीकि रामायण में अयोध्या को कोसल राज्य की राजधानी बताया गया है, जिसे मनु ने बसाया और जहाँ इक्ष्वाकु वंश के राजा, दशरथ और फिर राम ने राज किया। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना भी अयोध्या में ही शुरू की थी।
नया मंदिर नागर शैली में बना है और जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। रामलला की मूर्ति श्याम शिला से बनी है, जिसमें प्रभु धनुष-बाण लिए बालरूप में खड़े हैं। परिसर में दूसरे देवालय और राम दरबार भी बनाए गए हैं।
दर्शन और आरती
मंदिर में भोर की मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक दिन में कई आरतियाँ होती हैं, और बीच में श्रृंगार, भोग और संध्या आरती होती है। कुछ आरतियों में शामिल होने के लिए पास लेना होता है। दर्शन का समय, आरती पास, विशेष दर्शन की व्यवस्था, मोबाइल-सामान के नियम और लॉकर सुविधा समय-समय पर बदलती रहती है। इसलिए निकलने से पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा जानकारी देखें। कोई व्यक्ति पैसे लेकर ‘वीआईपी दर्शन’ का वादा करे तो सावधान रहें।
- दर्शन की कतार लंबी होती है, पर चलती रहती है। पानी साथ रखें और बुज़ुर्गों के लिए व्हीलचेयर सुविधा के बारे में मंदिर के सहायता केंद्र से पूछें।
- सामान जितना कम हो, उतना अच्छा। ज़्यादातर सामान बाहर जमा करना पड़ता है।
- प्रसाद मंदिर की ओर से मिलता है; बाहर से फूल-प्रसाद ले जाने के नियम वहीं पूछें।
हनुमानगढ़ी पहले क्यों
अयोध्या में एक पुरानी परंपरा है कि रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी में हनुमान जी के दर्शन किए जाएँ। मान्यता है कि लंका विजय के बाद राम जी ने हनुमान जी को अयोध्या की रक्षा का भार सौंपा, इसलिए वे यहाँ के राजा या कोतवाल माने जाते हैं, और उनकी अनुमति से ही राम के दर्शन होते हैं। हनुमानगढ़ी एक ऊँचे टीले पर बना किले जैसा मंदिर है जहाँ सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं। यहाँ बेसन के लड्डू का प्रसाद चढ़ता है। दर्शन के समय हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले बहुत से भक्त मिलेंगे।
कनक भवन, सरयू घाट और दूसरे स्थान
कनक भवन
कथा है कि माता कैकेयी ने यह भवन सीता जी को मुँह-दिखाई में दिया था। यहाँ सीता-राम युगल रूप में सोने के मुकुट पहने विराजते हैं, इसलिए इसे सोने का घर कहते हैं। आज का भवन ओरछा राजघराने की रानी ने बनवाया था। यहाँ का कीर्तन और शाम का माहौल बहुत मधुर होता है।
सरयू घाट
सरयू नदी में स्नान अयोध्या यात्रा का अहम हिस्सा है। राम की पैड़ी और नया घाट पर लोग स्नान करते हैं, और शाम को नया घाट पर सरयू आरती होती है। गुप्तार घाट के बारे में मान्यता है कि यहीं प्रभु राम ने सरयू में प्रवेश कर अपनी लीला समेटी थी।
दूसरे दर्शन
- दशरथ महल, जहाँ राजा दशरथ का राजभवन माना जाता है
- नागेश्वरनाथ मंदिर, जिसे राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित माना जाता है
- त्रेता के ठाकुर, सीता रसोई और रत्न सिंहासन
- मणि पर्वत और सूर्य कुंड, थोड़ा समय हो तो
राम नवमी, दीपोत्सव और दूसरे उत्सव
राम नवमी पर दोपहर में राम जन्मोत्सव होता है और अयोध्या में सबसे बड़ी भीड़ उमड़ती है। मंदिर में इस दिन दोपहर को सूर्य की किरणों से रामलला के ललाट पर तिलक की व्यवस्था की गई है। घर पर उस दिन की पूजा कैसे करें, यह राम नवमी पूजा विधि में पढ़ें।
दीपावली से पहले की शाम सरयू तट पर दीपोत्सव होता है, जब राम की पैड़ी अनगिनत दीयों से जगमगा उठती है। कार्तिक में चौदह कोसी और पंचकोसी परिक्रमा होती है, अगहन में विवाह पंचमी पर राम-सीता विवाह का उत्सव और सावन में झूला मेला लगता है। इन दिनों में जाना हो तो होटल बहुत पहले बुक करें और भीड़ के लिए तैयार रहें।
अयोध्या का प्रसाद और खरीदारी
हनुमानगढ़ी के बेसन के लड्डू, बाज़ार की स्थानीय मिठाइयाँ और राम मंदिर का प्रसाद लोग घर ले जाते हैं। रामनामी दुपट्टा, राम दरबार के चित्र, तुलसी की माला और सरयू जल की छोटी शीशी भी बहुत लोग खरीदते हैं। घर पर अयोध्या का प्रसाद बाँटते समय परिवार के साथ राम जी की आरती गाना एक सुंदर परंपरा बन गया है। दुकानों पर दाम पहले तय कर लें, और भीड़ वाले बाज़ारों में अपने सामान का ध्यान रखें। सरयू में फूल-दीप प्रवाहित करें तो प्लास्टिक की थैली या थर्मोकोल का इस्तेमाल न करें; पत्तों के दोने ही लें, ताकि नदी साफ़ रहे।
यात्रा सुझाव
- भीड़ कम चाहिए तो त्योहार, लंबे सप्ताहांत और छुट्टियों से बचें। तिथि और वार आज के पंचांग में देख लें।
- सुबह सरयू स्नान, फिर हनुमानगढ़ी, फिर रामलला, फिर कनक भवन: यह क्रम आधे दिन में आराम से हो जाता है।
- शाम को नया घाट की सरयू आरती में बैठें; उसके बाद राम की पैड़ी पर टहलना अच्छा लगता है।
- मंदिर परिसर में काफ़ी पैदल चलना होता है; बुज़ुर्गों के लिए ई-रिक्शा और व्हीलचेयर की जानकारी पहले ले लें।
- गर्मियों में दोपहर की धूप तेज़ होती है, इसलिए दर्शन सुबह या शाम रखें।
- घर लौटकर श्री राम जी की आरती के साथ यात्रा का संकल्प पूरा करें।

