12 ज्योतिर्लिंग: नाम, स्थान और महत्व

12 ज्योतिर्लिंग हैं: सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर। शिव पुराण के अनुसार इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में प्रकट हुए, इसलिए इनका दर्शन सबसे पुण्यदायी माना जाता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 6 मिनट का पाठ
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भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं: गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर, आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर, उत्तराखंड में केदारनाथ, महाराष्ट्र में भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर, उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ, झारखंड में वैद्यनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वरम। ज्योतिर्लिंग का अर्थ है वह स्थान जहाँ शिव स्वयं प्रकाश के रूप में प्रकट हुए। ऐसा माना जाता है कि इनके नाम का स्मरण भी पुण्य देता है।

ज्योतिर्लिंग क्या है: शिव पुराण की कथा

शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में एक कथा आती है। एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में बहस हो गई कि दोनों में बड़ा कौन है। बात इतनी बढ़ी कि तभी उनके बीच आग का एक विशाल स्तंभ प्रकट हुआ, जिसका न ऊपर छोर दिखता था, न नीचे।

तय हुआ कि जो इस स्तंभ का अंत खोज लेगा, वही बड़ा माना जाएगा। विष्णु जी वराह बनकर नीचे की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर ऊपर। युगों तक चलकर भी विष्णु जी को अंत नहीं मिला, तो वे लौटकर बोले कि यह अनंत है। ब्रह्मा जी ने रास्ते में गिरते हुए केतकी के फूल को गवाह बनाकर झूठ कह दिया कि उन्होंने ऊपरी छोर देख लिया है। तब उस स्तंभ से शिव प्रकट हुए, ब्रह्मा जी के झूठ पर क्रोध किया और विष्णु जी की सच्चाई की प्रशंसा की। इसी कारण आज भी शिव पूजा में केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता।

वह अनंत ज्योति-स्तंभ ही ज्योतिर्लिंग का मूल भाव है। शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में बताया गया है कि भक्तों की प्रार्थना पर शिव बारह स्थानों पर इसी ज्योति रूप में स्थिर हुए। हर स्थान की अपनी अलग कथा है: सोमनाथ में चंद्रमा का शाप-मुक्त होना, महाकाल में दूषण असुर का वध, रामेश्वरम में श्रीराम का शिवलिंग स्थापित करना, और घृष्णेश्वर में भक्त घुश्मा का पुत्र जीवित होना।

12 ज्योतिर्लिंग: नाम, राज्य और नदी

क्रमज्योतिर्लिंगस्थानराज्यनदी / समुद्र
1सोमनाथप्रभास पाटन, वेरावल के पासगुजरातअरब सागर तट, त्रिवेणी संगम
2मल्लिकार्जुनश्रीशैलमआंध्र प्रदेशकृष्णा नदी
3महाकालेश्वरउज्जैनमध्य प्रदेशक्षिप्रा नदी
4ओंकारेश्वरमान्धाता द्वीप, खंडवा ज़िलामध्य प्रदेशनर्मदा नदी
5केदारनाथरुद्रप्रयाग ज़िला, हिमालयउत्तराखंडमंदाकिनी नदी
6भीमाशंकरसह्याद्रि पर्वत, पुणे ज़िलामहाराष्ट्रभीमा नदी का उद्गम
7काशी विश्वनाथवाराणसीउत्तर प्रदेशगंगा नदी
8त्र्यंबकेश्वरनासिक के पास, ब्रह्मगिरिमहाराष्ट्रगोदावरी का उद्गम
9वैद्यनाथदेवघरझारखंड—
10नागेश्वरद्वारका के पास, दारुकावनगुजरातसमुद्र तट क्षेत्र
11रामेश्वरम (रामनाथस्वामी)रामेश्वरम द्वीपतमिलनाडुबंगाल की खाड़ी / मन्नार की खाड़ी
12घृष्णेश्वरवेरुल, एलोरा गुफाओं के पासमहाराष्ट्र—

कुछ ज्योतिर्लिंगों के स्थान को लेकर परंपराओं में मतभेद है, जिसे ईमानदारी से जान लेना अच्छा है। वैद्यनाथ के लिए झारखंड का देवघर सबसे मान्य है, पर महाराष्ट्र का परली वैजनाथ भी यही दावा करता है, क्योंकि स्तोत्र में “परल्यां वैद्यनाथं” आता है। नागेश्वर के लिए द्वारका के अलावा महाराष्ट्र का औंढा नागनाथ और उत्तराखंड का जागेश्वर भी माने जाते हैं। भीमाशंकर के लिए असम की एक परंपरा भी है। उत्तर भारत में आम तौर पर ऊपर की तालिका वाले स्थान ही माने जाते हैं।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का भाव

बारहों ज्योतिर्लिंगों के नाम याद रखने का सबसे सुंदर तरीका यह छोटा स्तोत्र है, जिसे बहुत से घरों में सुबह-शाम बोला जाता है:

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

भाव यह है: सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकाल, ओंकार में अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी में भीमाशंकर, सेतुबंध में रामेश्वर, दारुकावन में नागेश, वाराणसी में विश्वेश्वर, गौतमी (गोदावरी) के तट पर त्र्यंबक, हिमालय में केदार और शिवालय में घुश्मेश्वर। जो सुबह-शाम इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप स्मरण मात्र से मिट जाते हैं। जो लोग सब तीर्थ नहीं जा सकते, उनके लिए यह रोज़ का स्मरण ही यात्रा है।

उत्तर भारत के ज्योतिर्लिंग

काशी विश्वनाथ, वाराणसी

गंगा किनारे बसी काशी को शिव की नगरी कहा जाता है और मान्यता है कि यहाँ शरीर छोड़ने वाले को मोक्ष मिलता है। दर्शन, आरती और गलियों की पूरी जानकारी काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन लेख में है।

केदारनाथ, उत्तराखंड

हिमालय में बसा यह मंदिर साल में सिर्फ़ गर्मी से दिवाली के आसपास तक खुलता है; सर्दियों में बाबा की डोली ऊखीमठ ले जाई जाती है। कपाट खुलने-बंद होने की तारीख हर साल मंदिर समिति घोषित करती है, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक सूचना ज़रूर देखें। केदारनाथ अक्सर चार धाम यात्रा के साथ किया जाता है।

महाकालेश्वर, उज्जैन

बारह में से एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, जहाँ भोर की भस्म आरती प्रसिद्ध है। बुकिंग और नियम महाकाल भस्म आरती लेख में देखें।

ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश

नर्मदा के बीच ॐ आकार के द्वीप पर स्थित। सामने तट पर ममलेश्वर (अमलेश्वर) मंदिर है, और परंपरा दोनों के दर्शन को मिलाकर पूरा मानती है। उज्जैन से सड़क मार्ग से यहाँ आसानी से पहुँचा जाता है।

दर्शन यात्रा का क्रम

बारह ज्योतिर्लिंग देश के छह राज्यों में फैले हैं, इसलिए ज़्यादातर लोग इन्हें कई यात्राओं में पूरा करते हैं। क्षेत्र के हिसाब से समूह बनाना सबसे व्यावहारिक है:

  1. मध्य प्रदेश: महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर, एक साथ।
  2. महाराष्ट्र: त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर और भीमाशंकर; साथ में चाहें तो परली और औंढा भी।
  3. गुजरात: सोमनाथ और नागेश्वर, द्वारकाधीश दर्शन के साथ।
  4. उत्तर भारत: काशी विश्वनाथ अलग से, और केदारनाथ चार धाम या दो धाम के साथ।
  5. पूर्व: देवघर वैद्यनाथ, जहाँ सावन में सुल्तानगंज से काँवड़ लेकर जाने की परंपरा है।
  6. दक्षिण: मल्लिकार्जुन (श्रीशैलम) और रामेश्वरम।

मंदिरों के दर्शन समय, शुल्क, बुकिंग और रास्ते हर मौसम में बदलते रहते हैं। यात्रा से पहले संबंधित मंदिर ट्रस्ट या सरकारी पोर्टल से ताज़ा जानकारी लें।

सावन और शिवरात्रि

सावन का पूरा महीना और महाशिवरात्रि ज्योतिर्लिंग दर्शन के सबसे बड़े अवसर हैं। इन दिनों भीड़ बहुत होती है, इसलिए बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ जाने वाले सामान्य दिनों में जाना पसंद करते हैं। जो यात्रा न कर सकें, वे घर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ऊपर का स्तोत्र पढ़ें और ॐ जय शिव ओंकारा आरती करें। भाव वही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 ज्योतिर्लिंग के नाम क्या हैं?

सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर।

सबसे ज्यादा ज्योतिर्लिंग किस राज्य में हैं?

महाराष्ट्र में तीन ज्योतिर्लिंग हैं: भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर। गुजरात और मध्य प्रदेश में दो-दो हैं।

पहला ज्योतिर्लिंग कौन सा है?

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सबसे पहले सौराष्ट्र के सोमनाथ का नाम आता है, इसलिए इसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

उत्तर प्रदेश में कौन सा ज्योतिर्लिंग है?

उत्तर प्रदेश में वाराणसी का काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है, जो गंगा के तट पर स्थित है।

ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग में क्या अंतर है?

हर ज्योतिर्लिंग एक शिवलिंग है, लेकिन ज्योतिर्लिंग वे बारह स्थान हैं जहाँ शिव पुराण के अनुसार शिव स्वयं ज्योति रूप में प्रकट हुए। बाकी शिवलिंग भक्तों द्वारा स्थापित होते हैं।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कहाँ है?

सबसे मान्य स्थान झारखंड का देवघर है। महाराष्ट्र का परली वैजनाथ भी वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग होने का दावा करता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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