विवाह पंचमी
विवाह पंचमी भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की वर्षगाँठ है, जो मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। अयोध्या, जनकपुर, मिथिला और बुंदेलखंड में इस दिन राम बारात निकलती है और मंदिरों में सीता-राम का विवाह उत्सव पूरे विधि-विधान से रचाया जाता है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
रामायण की कथा है कि राजा जनक ने सीता जी के स्वयंवर में शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। विश्वामित्र जी के साथ आए श्रीराम ने धनुष उठाया तो वह टूट गया, और फिर अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुँचे। उसी समय लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह भी हुए। कुछ परंपराओं में यह भी माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसी तिथि को रामचरितमानस पूर्ण किया।
किस तिथि को
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, जो सूर्योदय के समय हो। शुक्ल पक्ष होने से उत्तर और दक्षिण, दोनों पंचांगों में यही महीना है। इस पूरे महीने का महत्व मार्गशीर्ष मास लेख में पढ़ें।
कैसे मनाते हैं
- अयोध्या के कनक भवन और दूसरे मंदिरों से राम बारात निकलती है; नेपाल के जनकपुर धाम में कई दिन का विवाह महोत्सव होता है।
- घर पर सीता-राम की छवि को पीले वस्त्र पहनाकर गठबंधन किया जाता है, रामचरितमानस का बालकांड, विशेषकर सीता-राम विवाह प्रसंग, पढ़ा जाता है।
- मिथिला में पारंपरिक विवाह गीत और हँसी-ठिठोली वाले गाली गीत गाए जाते हैं।
- मिथिला और नेपाल के कुछ परिवार इस दिन बेटी का विवाह नहीं करते, क्योंकि सीता जी के जीवन में आए कष्टों को याद किया जाता है। दूसरी जगहों पर इसे विवाह के लिए शुभ दिन माना जाता है; अपने पुरोहित की सलाह मानें।
उत्सव की पूरी विधि विवाह पंचमी पर राम-सीता विवाह कैसे मनाएं में है। पूजा पूरी होने पर श्री राम जी की आरती या श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन गाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवाह पंचमी कब मनाई जाती है?
विवाह पंचमी पर क्या करें?
क्या विवाह पंचमी के दिन शादी करना शुभ है?
राम-सीता का विवाह कहाँ हुआ था?
राम जी ने कौन-सा धनुष तोड़ा था?
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