2026

देवउठनी एकादशी 2026

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मुख्य विवरण

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देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी क्या है

देवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसे प्रबोधिनी, देवोत्थान और देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इसी दिन चातुर्मास पूरा होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कामों का मौसम फिर खुल जाता है।

किस तिथि को

कार्तिक शुक्ल एकादशी — दिवाली के ग्यारह दिन बाद और कार्तिक पूर्णिमा से चार दिन पहले। शुक्ल पक्ष होने से दोनों पंचांगों में महीना एक ही है। चार महीने पहले आषाढ़ की देवशयनी एकादशी पर चातुर्मास शुरू हुआ था।

कथा संक्षेप में

पद्म पुराण में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को ब्रह्मा-नारद संवाद के रूप में इसका माहात्म्य बताते हैं: इस एक दिन का व्रत और रात्रि जागरण हज़ार अश्वमेध यज्ञों जितना फल देता है। लोक में यह कथा भी कही जाती है कि शंखासुर से युद्ध के बाद थके विष्णु आषाढ़ में सोए और कार्तिक में जागे। पूरी कथा देवउठनी एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।

कैसे मनाते हैं

  • आँगन में गेरू और खड़िया से भगवान के चरण बनाए जाते हैं, उन पर गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, शकरकंद और मौसमी फल रखकर डलिया से ढका जाता है।
  • शाम को थाली या सूप बजाकर "उठो देव, बैठो देव, अंगुरिया चटकाओ देव" गाते हुए भगवान को जगाया जाता है।
  • कई परिवार इसी दिन, और कई अगले दिन द्वादशी को, शालिग्राम-तुलसी का विवाह करते हैं।

पूजा का क्रम देवउठनी एकादशी पूजा विधि में और तुलसी विवाह की कथा तुलसी विवाह कथा में है। तुलसी विवाह की तिथि के लिए तुलसी विवाह पृष्ठ देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवउठनी एकादशी कब आती है?
कार्तिक शुक्ल एकादशी को, दिवाली के ग्यारह दिन बाद।
देवउठनी एकादशी पर क्या होता है?
भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, चातुर्मास पूरा होता है और शुभ कामों का मौसम शुरू होता है।
देव कैसे जगाते हैं?
आँगन में गेरू से भगवान के चरण बनाकर उन पर गन्ना, सिंघाड़ा, बेर रखे जाते हैं और शाम को थाली बजाकर उठो देव, बैठो देव गाया जाता है।
क्या इसी दिन तुलसी विवाह होता है?
बहुत से परिवार इसी दिन तुलसी विवाह करते हैं, जबकि कई जगह यह अगले दिन द्वादशी को होता है। अपनी पारिवारिक परंपरा मानें।
देवउठनी एकादशी के बाद शादियाँ कब से शुरू होती हैं?
देवउठनी के बाद से विवाह मुहूर्त खुल जाते हैं, पर सही तारीख़ शुक्र-गुरु और मुहूर्त देखकर तय होती है।
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। चावल और सामान्य अनाज इस दिन नहीं खाए जाते।

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