2026

परिवर्तिनी एकादशी 2026

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मुख्य विवरण

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परिवर्तिनी एकादशी

परिवर्तिनी एकादशी क्या है

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि चातुर्मास की योगनिद्रा में सोए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं — इसी से नाम पड़ा परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी। उत्तर भारत में इसे जलझूलनी एकादशी, डोल ग्यारस और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

किस तिथि को

भाद्रपद शुक्ल एकादशी — राधा अष्टमी के तीन दिन बाद और अनंत चतुर्दशी से तीन दिन पहले। शुक्ल पक्ष होने से दोनों पंचांगों में महीना एक ही है। अगले दिन द्वादशी को वामन जयंती मनाई जाती है।

वामन और राजा बलि की कथा

पद्म पुराण में युधिष्ठिर के पूछने पर श्रीकृष्ण वामन अवतार की कथा सुनाते हैं। दानवीर राजा बलि ने तीनों लोक जीत लिए थे। भगवान वामन रूप में उसकी यज्ञशाला पहुँचे और तीन पग भूमि माँगी; दो पग में धरती-आकाश नाप लिए और तीसरा पग बलि ने अपना सिर आगे करके दिया। प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताल का राज्य दिया और उसके पास रहने का वचन भी। कथा में इस व्रत का फल वाजपेय यज्ञ के बराबर बताया गया है।

कैसे मनाते हैं

  • भगवान वामन की पूजा कर दही, चावल और चाँदी के दान का विधान है; व्रती स्वयं चावल नहीं खाते।
  • राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस दिन ठाकुर जी को सजी हुई पालकी (डोल) में बिठाकर ढोल-मंजीरे के साथ तालाब या नदी तक ले जाते हैं और जल विहार कराते हैं — यही जलझूलनी है।
  • कई जगह बालकृष्ण के जलवा पूजन (सूरज पूजा) की रस्म भी इसी दिन होती है।

फलाहार के लिए एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं, विष्णु के अवतारों के बारे में विष्णु के 10 अवतार और मूल कथा एकादशी व्रत कथा में पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिवर्तिनी एकादशी कब आती है?
भाद्रपद शुक्ल एकादशी को, राधा अष्टमी के तीन दिन बाद।
इसे परिवर्तिनी क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि चातुर्मास में सोए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं।
जलझूलनी एकादशी क्या है?
यह परिवर्तिनी एकादशी का ही लोक नाम है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस दिन ठाकुर जी को डोल में बिठाकर जल विहार के लिए तालाब या नदी तक ले जाते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी की कथा क्या है?
वामन अवतार और राजा बलि की, जिसमें भगवान ने तीन पग में तीनों लोक नाप लिए थे।
एकादशी व्रत में क्या खाएं?
फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। चावल और सामान्य अनाज इस दिन नहीं खाए जाते।

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