मौनी अमावस्या
मौनी अमावस्या क्या है
मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या है, जिस दिन मौन रहकर स्नान, जप और दान करने की परंपरा है। मौन का अर्थ है वाणी को विश्राम देना ताकि मन भीतर की ओर मुड़े; इसीलिए कहा जाता है कि इस दिन मौन रहकर किया गया जप और स्नान कई गुना फल देता है। एक लोक मान्यता यह भी है कि इसी दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था, और मुनि शब्द से मौन जुड़ा है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग में यह माघ कृष्ण अमावस्या है; अमांत पंचांग में इसे पौष अमावस्या कहते हैं। स्नान के लिए वह दिन लिया जाता है जिसमें सूर्योदय के समय अमावस्या हो। जब यह अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तो सोमवती मौनी अमावस्या का संयोग बहुत दुर्लभ और पुण्यदायी माना जाता है।
मौन व्रत कैसे रखें
- सुबह उठने के बाद से स्नान तक किसी से बात न करें। जो पूरा दिन मौन न रख सकें, वे कम से कम स्नान और पूजा तक मौन रखें।
- सूर्योदय से पहले गंगा या किसी नदी में, या घर पर पानी में गंगाजल और थोड़े तिल डालकर स्नान करें।
- स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और मन ही मन गायत्री मंत्र या अपने इष्ट का नाम जपें।
- पितरों के लिए तिल-जल का तर्पण करें।
- तिल, गुड़, कंबल, घी और अन्न का दान करें; मौन रहते हुए भी दान दिया जा सकता है।
- दिन भर क्रोध, बहस और निंदा से बचें; शाम को दीपक जलाकर मौन खोलें।
प्रयागराज का मुख्य स्नान
प्रयागराज के माघ मेले और कुंभ में मौनी अमावस्या सबसे बड़ा स्नान पर्व होता है, जिस दिन अखाड़ों का अमृत (शाही) स्नान भी होता है। काशी, हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर में भी इस दिन घाटों पर बहुत भीड़ रहती है।
स्नान और दान की पूरी सूची मौनी अमावस्या: मौन, स्नान और दान में है। पूरे माघ मास का संदर्भ माघ अमावस्या पृष्ठ पर, और मन से जप के लिए गायत्री मंत्र का अर्थ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मौनी अमावस्या पर मौन क्यों रखा जाता है?
क्या पूरे दिन मौन रखना ज़रूरी है?
मौनी अमावस्या पर क्या दान करें?
घर पर मौनी अमावस्या का स्नान कैसे करें?
मौनी अमावस्या किस महीने में आती है?
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