माघ पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा क्या है
माघ महीने की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहते हैं। यह माघ स्नान का आखिरी और सबसे बड़ा स्नानों में से एक है: पौष पूर्णिमा से संगम पर रह रहे कल्पवासी इसी दिन स्नान करके अपना एक महीने का व्रत पूरा करते हैं। पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में माघ मास के स्नान की बड़ी महिमा बताई गई है, और मान्यता है कि इस महीने देवता भी प्रयाग में स्नान करने आते हैं।
किस तिथि को
माघ शुक्ल पूर्णिमा, उदया तिथि के अनुसार। स्नान ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक सबसे अच्छा माना जाता है। पूर्णिमा व्रत और चंद्र अर्घ्य चंद्रोदय पर पूर्णिमा वाली शाम को होते हैं। पूर्णिमांत पंचांग में अगले दिन से फाल्गुन शुरू होता है।
कैसे मनाते हैं
- प्रयागराज, हरिद्वार, काशी या किसी भी पवित्र नदी में भोर का स्नान; घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान।
- कल्पवासी स्नान के बाद पूजा, हवन और ब्राह्मण भोजन करके शैय्या दान करते हैं और घर लौटते हैं।
- भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा और गंगा मैया की आरती।
- तिल, गुड़, कंबल, घी और अन्न का दान। माघ में तिल का दान खास माना गया है।
इसी दिन और क्या
संत रविदास जी की जयंती माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है। काशी के सीर गोवर्धनपुर में उनके जन्मस्थान पर बड़ा मेला लगता है और पंजाब, उत्तर प्रदेश व हरियाणा में शोभा यात्राएँ निकलती हैं। कई जगह इसी दिन से होली की तैयारी के लिए होलिका दहन की जगह पर डंडा गाड़ने की परंपरा भी है।
माघ स्नान के बाकी बड़े दिन पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माघ पूर्णिमा पर स्नान का क्या महत्व है?
कल्पवास कब खत्म होता है?
माघ पूर्णिमा पर क्या दान करें?
क्या माघ पूर्णिमा पर रविदास जयंती होती है?
घर पर माघ पूर्णिमा कैसे मनाएँ?
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