2026

फाल्गुन अमावस्या 2026

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मुख्य विवरण

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फाल्गुन अमावस्या

फाल्गुन अमावस्या क्या है

फाल्गुन अमावस्या महाशिवरात्रि के ठीक अगले दिन आने वाली अमावस्या है। शिवरात्रि की रात भर की पूजा और जागरण के बाद भक्त इस सुबह नदी स्नान करते हैं, पितरों का तर्पण करते हैं और दान देकर व्रत का समापन करते हैं। मौसम बदलने लगता है, ठंड जा रही होती है और होली की तैयारी का माहौल बनने लगता है।

किस तिथि को

पूर्णिमांत पंचांग में यह फाल्गुन कृष्ण अमावस्या है, जो फ़रवरी-मार्च में पड़ती है। अमांत पंचांग में इसे माघ अमावस्या कहा जाता है, क्योंकि वहाँ माघ महीना इसी अमावस्या पर पूरा होता है; इसीलिए दक्षिण के कैलेंडर में महाशिवरात्रि भी माघ कृष्ण चतुर्दशी लिखी मिलती है। स्नान-दान सूर्योदय वाली अमावस्या पर होता है।

इस दिन क्या करते हैं

  • शिवरात्रि का व्रत रखने वाले कई भक्त इस सुबह स्नान-पूजा के बाद पारण करते हैं।
  • गंगा, यमुना या नर्मदा में स्नान, और शिवलिंग पर जल व बेलपत्र।
  • पितरों के लिए तिल-जल का तर्पण; पीपल की जड़ में जल और शाम को दीपक।
  • अन्न, वस्त्र और गुड़ का दान।

क्षेत्रीय परंपराएँ

उज्जैन, काशी और हरिद्वार में शिवरात्रि के मेले का आख़िरी स्नान इसी दिन होता है। मथुरा-वृंदावन और बरसाना में इसके बाद से होली का रंग चढ़ने लगता है, और फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक शुरू होता है, जिसमें विवाह जैसे शुभ काम रोक दिए जाते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल के कुछ हिस्सों में इस अमावस्या पर कुल देवता की विशेष पूजा की जाती है।

आगे क्या आता है

इस अमावस्या से पंद्रह दिन बाद फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगों की होली। शिवरात्रि की पूजा का क्रम समझने के लिए महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा विधि पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फाल्गुन अमावस्या कब आती है?
पूर्णिमांत पंचांग में फाल्गुन कृष्ण अमावस्या को, आमतौर पर महाशिवरात्रि के अगले दिन। अमांत पंचांग में इसे माघ अमावस्या कहते हैं।
क्या शिवरात्रि का व्रत फाल्गुन अमावस्या को खोलते हैं?
हाँ, बहुत से भक्त शिवरात्रि के अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने से पहले पारण करते हैं। पारण का समय उस साल के पंचांग में देखें।
फाल्गुन अमावस्या पर क्या दान करें?
अन्न, वस्त्र, गुड़ और तिल का दान किया जाता है, साथ में पितरों का तर्पण भी।
होलाष्टक कब शुरू होता है?
फाल्गुन अमावस्या के बाद आने वाली फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक होलाष्टक माना जाता है।
होली इस अमावस्या से कितने दिन बाद आती है?
लगभग पंद्रह दिन बाद फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और उसके अगले दिन रंगों की होली होती है।

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