2026

ललिता जयंती 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

ललिता जयंती

ललिता जयंती माघ पूर्णिमा को देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के प्राकट्य के रूप में मनाई जाती है। दस महाविद्याओं में इन्हें षोडशी भी कहा जाता है। यह पर्व दक्षिण भारत और श्रीविद्या उपासकों में ज़्यादा प्रचलित है, जबकि उत्तर भारत में यह दिन मुख्य रूप से माघ पूर्णिमा के स्नान-दान के साथ जुड़कर आता है।

देवी ललिता कौन हैं

ब्रह्मांड पुराण के ललितोपाख्यान में कथा है कि भंडासुर नाम के असुर से त्रस्त देवताओं ने यज्ञ किया और उस यज्ञ की अग्नि से देवी ललिता प्रकट हुईं। उन्होंने भंडासुर का अंत किया और कामेश्वर शिव से उनका विवाह हुआ। देवी के हाथों में पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और फूलों के बाण बताए गए हैं। ललिता सहस्रनाम, जिसमें देवी के एक हज़ार नाम हैं, इसी पुराण का हिस्सा है और आज भी बड़े आदर से पढ़ा जाता है।

किस तिथि को

माघ शुक्ल पूर्णिमा, जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। यही माघ पूर्णिमा है, जिस दिन प्रयागराज में कल्पवास पूरा होता है और गंगा स्नान का बड़ा महत्व है।

कैसे मनाते हैं

  • स्नान के बाद देवी को लाल फूल, कुमकुम, चुनरी और खीर या मिष्ठान्न का भोग।
  • ललिता सहस्रनाम या ललिता त्रिशती का पाठ; जो संस्कृत पाठ न कर सकें वे जय अम्बे गौरी आरती से देवी की स्तुति करते हैं।
  • सुहागिन स्त्रियों को सुहाग की वस्तुएँ देना और अन्न-वस्त्र का दान।

उत्तर भारत में

उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य (सीतापुर) में ललिता देवी का प्राचीन मंदिर है, जिसे शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है; प्रयागराज में भी ललिता देवी का मंदिर है। शक्तिपीठों के बारे में 51 शक्तिपीठ लेख देखें, और हर महीने की पूर्णिमा के लिए पूर्णिमा कैलेंडर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ललिता जयंती कब होती है?
ललिता जयंती माघ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है, यानी माघ पूर्णिमा के दिन।
देवी ललिता कौन हैं?
देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी आदिशक्ति का सौम्य रूप हैं, जिन्हें दस महाविद्याओं में षोडशी कहा जाता है।
ललिता जयंती पर क्या पाठ करें?
ललिता सहस्रनाम या ललिता त्रिशती का पाठ प्रमुख है। जो यह न पढ़ सकें, वे देवी की आरती और दुर्गा चालीसा पढ़ सकते हैं।
उत्तर भारत में ललिता देवी का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ है?
सीतापुर ज़िले के नैमिषारण्य में ललिता देवी का प्राचीन मंदिर है, जिसे शक्तिपीठ माना जाता है।
ललिता जयंती की कथा किस पुराण में है?
देवी के प्राकट्य और भंडासुर वध की कथा ब्रह्मांड पुराण के ललितोपाख्यान में है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...